उत्तर प्रदेश के बिजनौर के एक छोटे से गांव नंदपुर में इन दिनों एक अजीब नज़ारा देखने को मिला, जिससे हर कोई हैरान था. मंदिरों में देवी-देवताओं के प्रकट होने की कहानियां तो आम हैं, लेकिन यहां एक कुत्ता पिछले चार दिनों से लगातार एक मंदिर में रखी मूर्ति की प्रतिमा का चक्कर लगा रहा था और पूरे गांव ने उसे ‘कुत्ता महाराज’ का नाम दे दिया. इतना ही नहीं, उसके आसपास लोगों की भीड़ भी जमा होने लगी है. लोगों में उस कुत्ते को लेकर एक अलग आस्था देखी जा रही है. इस मामले को लेकर लोग दो गुट में बंट गए हैं, एक वो जो मानते हैं ये कुत्ता वाकई भवगान का अवतार है, दुसरा वो जो विज्ञान के तर्क के साथ जाना चाहता है. अगर आप भी इसका जवाब विज्ञान में ढूंढते-ढूंढते यहां आये हैं तो आप बिलकुल सही जगह आये हैं आइये आपको दोनों पक्षों के तर्क से रूबरू करवाते हैं, और अगर आपके कुत्ते में भी ऐसा लक्षण दिखे तो आपको क्या करना चाहिए, आइये जानते हैं…
चार दिन चक्कर लगाने के बाद कुत्ता बैठ गया
कुत्ते ने चार दिनों तक लगातार गांव का चक्कर लगाया. अब थकान के कारण वह एक जगह बैठ गया है, लेकिन लोगों की आस्था कम नहीं हुई है. प्रशासन को भी इस मामले की जानकारी दी गई, जिसके बाद पशु डॉक्टरों की एक टीम मौके पर पहुंची और कुत्ते की जांच की. डॉक्टरों ने बताया कि कुत्ते में किसी बीमारी के कोई लक्षण नहीं मिले हैं. इसके बावजूद, गांव वालों का मानना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि एक “दिव्य संकेत” है.
लोग क्या कह रहे हैं?
एक स्थानीय निवासी का कहना है, “कुत्ते को चक्कर लगाते हुए चार दिन हो गए हैं. हम इसे भैरव बाबा (एक देवता) की परिक्रमा मानते हैं. आज वह आराम करने के लिए रुका है. कुछ लोग कह रहे थे कि शायद वह परेशान था, लेकिन डॉक्टरों की एक टीम आई. उन्होंने कहा कि कुत्ते को कोई बीमारी नहीं है. हम इसे भगवान का रूप मानते हैं.”
A stray dog in Nandpur village, Bijnor (UP) became an object of devotion after videos showed it circling a Hanuman idol in a temple.
Devotees now treat it as a spiritual figure… the dog rests on a mattress inside the temple with a priest beside it, as people line up to touch… pic.twitter.com/qdEAAZnBgL
— زماں (@Delhiite_) January 16, 2026
इसके पीछे वैज्ञानिक कारण क्या हैं?
नेटवर्क18 की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का कहना है कि कुत्तों में यह व्यवहार कॉग्निटिव डिस्फंक्शन सिंड्रोम (CDS) से जुड़ा हो सकता है. यह कुत्तों में उम्र से जुड़ी एक आम बीमारी है जो दिमाग पर असर डालती है, ठीक वैसे ही जैसे इंसानों में अल्जाइमर की बीमारी होती है. CDS दिमाग को उम्र के साथ होने वाले नुकसान के कारण धीरे-धीरे बढ़ता है. दुर्भाग्य से, इस बीमारी का कोई एक इलाज या उपचार नहीं है.
इस तरह के व्यवहार के दूसरे संभावित कारणों में वेस्टिबुलर बीमारी, ऑब्सेसिव-कम्पल्सिव व्यवहार, या रेबीज भी शामिल हो सकते हैं. वेस्टिबुलर डिसऑर्डर भी इसमें शामिल हो सकते हैं, क्योंकि ये कुत्ते के संतुलन की भावना को प्रभावित करते हैं. डॉक्टरों और जानवरों के विशेषज्ञों ने कहा है कि ये मेडिकल समस्याएं हैं, न कि कोई अलौकिक संकेत.
हिंदू संस्कृति में, असामान्य घटनाओं को अक्सर आध्यात्मिक नज़रिए से देखा जाता है. हिंदू धर्म सिखाता है कि दुनिया पवित्र ऊर्जा से भरी है, जिसमें जानवरों और प्रकृति की ऊर्जा भी शामिल है। पुराणों जैसे प्राचीन ग्रंथों में देवताओं के विभिन्न रूपों में प्रकट होने का ज़िक्र है, जैसे राम के भक्त हनुमान, या भैरव, जो शिव का एक रूप हैं और अक्सर कुत्तों से जुड़े होते हैं. बिजनौर जैसे ग्रामीण इलाकों में, लोग स्वाभाविक रूप से ऐसी घटनाओं को अलौकिक मानते हैं और उन्हें सामुदायिक प्रार्थनाओं में शामिल करते हैं.
अगर आपके कुत्ते में दिखता है ऐसा लक्षण
अगर आपके कुत्ते में गोल-गोल घूमना, बैलेंस खोना जैसा लक्षण दिखें तुरंत वेटेरिनेरियन के पास जाएं यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है. वेटेरिनेरियन को दिखाने के लिए अपने कुत्ते के असामान्य व्यवहार का वीडियो बनाएं. चोट से बचाने के लिए अपने कुत्ते के आस-पास से भारी सामान हटा दें किसी खुली जगह पार उसे रखें, यह सुनिश्चित करें कि आपके कुत्ते को डिहाइड्रेशन न हो. वेटेरिनेरियन से सलाह लिए बिना कोई भी दवा न दें.
इससे पहले भी हो चुकी है यह घटना
2017 में, बांदा ज़िले में एक कुत्ता शाम को एक शिव मंदिर में आता था और पूरी रात उसके चारों ओर चक्कर लगाता था. यह एक हफ़्ते तक चलता रहा. इस घटना को देखने के लिए भक्त मंदिर में जमा हो गए. लोगों ने इसे भक्ति या चमत्कार माना. हालाँकि, कोई वैज्ञानिक निष्कर्ष या मेडिकल रिपोर्ट कभी नहीं दी गई. इसी तरह, 2016 में, कर्नाटक के पुट्टेनहल्ली में महालक्ष्मी मंदिर के पास एक कुत्ता हर सुबह 4 बजे से शाम तक मंदिर के चारों ओर चक्कर लगाता था. भीड़ जमा होने से ट्रैफिक जाम हो गया। इस घटना पर मीडिया का काफी ध्यान गया.
चीन में एक साथ सैंकड़ों भेड़ों के साथ हुआ था यह मामला
कुछ ऐसी ही घटना चीन में हुई थी जब सैंकड़ों भेड़ एक ही जगह पर चक्कर लगाने लगे. चीन के इनर मंगोलिया में भेड़ों से जुड़ी घटना पर कोई ऑफिशियल नतीजा या सरकारी जांच रिपोर्ट नहीं आई थी. हालांकि, वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट्स ने इस घटना को काफी हद तक समझ लिया है. सबसे ज़्यादा मानी जाने वाली वजह एक ब्रिटिश यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और एक्सपर्ट मैट बेल ने बताई थी. उनके मुताबिक, भेड़ों को लंबे समय तक एक छोटे से बाड़े में रखा गया था, जिससे वे परेशान हो गईं. इस वजह से वे एक ही जगह पर बार-बार गोल-गोल घूमने लगीं क्योंकि बाड़े में आगे बढ़ने की जगह नहीं थी.
भेड़ें ऐसे जानवर भी होती हैं जो आगे वाली भेड़ को फॉलो करती हैं. शुरुआत में कुछ भेड़ों ने ऐसा करना शुरू किया, और फिर पूरा झुंड इसमें शामिल हो गया. एक और मुमकिन वजह यह थी कि यह किसी बैक्टीरियल इन्फेक्शन की वजह से हो सकता है जो दिमाग पर असर डालता है और गोल-गोल घूमने का व्यवहार पैदा करता है. हालांकि, ऐसे मामलों में आमतौर पर 48 घंटे के अंदर मौत हो जाती है. यहां, भेड़ें 12 दिनों तक गोल-गोल घूमती रहीं और बताया गया कि वे स्वस्थ थीं.