<

Who is Vinod Tawde: बिहार में दिखाया संगठन का दम, अब यूपी में अगली परीक्षा, कौन हैं विनोद तावड़े?

Who is Vinod Tawde: बीजेपी ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को यूपी का चुनाव प्रभारी बनाया है. यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब तावड़े की राजनीतिक यात्रा एक बड़े उतार-चढ़ाव से गुजरकर राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत हुई है. 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का टिकट कटने के बाद उनकी सियासत पर सवाल उठे थे, लेकिन संगठन में काम करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह मजबूत की.

Who is Vinod Tawde: भारतीय राजनीति में कई नेताओं का करियर चुनावी हार-जीत से तय होता है, लेकिन विनोद तावड़े की कहानी कुछ अलग है. 2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव का टिकट कटने के बाद ऐसा लगा कि राज्य की सक्रिय राजनीति में उनका प्रभाव कम हो गया है. इसके बाद तावड़े ने सार्वजनिक नाराजगी के बजाय संगठन के काम पर फोकस किया. 2020 में उन्हें बीजेपी की केंद्रीय टीम में जगह मिली और नवंबर 2021 में वह राष्ट्रीय महासचिव बने. अब पार्टी ने उन्हें उत्तर प्रदेश जैसे बेहद अहम राज्य की चुनावी जिम्मेदारी सौंपी है.

2019 का झटका बना राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री का रास्ता

विनोद तावड़े महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे. 2014 में बोरीवली से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद वह देवेंद्र फडणवीस सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और स्कूली शिक्षा, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा, खेल एवं युवा कल्याण, संस्कृति और मराठी भाषा जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले. लेकिन 2019 में उनका विधानसभा टिकट काट दिया गया. यह उनके राजनीतिक सफर का बड़ा झटका था. महाराष्ट्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे तावड़े के लिए यह फैसला किसी राजनीतिक विराम से कम नहीं माना गया. हालांकि, उन्होंने इसके बाद संगठन से दूरी बनाने के बजाय पार्टी के केंद्रीय संगठन में अपनी भूमिका मजबूत करने का रास्ता चुना. 2020 में वह राष्ट्रीय सचिव बने और 2021 में राष्ट्रीय महासचिव के पद तक पहुंचे.

महाराष्ट्र से दिल्ली तक ऐसे बदली तावड़े की भूमिका

तावड़े की राजनीतिक यात्रा की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से हुई थी. उन्होंने छात्र संगठन में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में काम किया और बाद में संगठनात्मक जिम्मेदारियां संभालीं. इसके बाद महाराष्ट्र बीजेपी में महासचिव, मुंबई बीजेपी अध्यक्ष और महाराष्ट्र विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष जैसे पदों तक पहुंचे. यही संगठनात्मक पृष्ठभूमि बाद में उनकी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी ताकत बनी. महाराष्ट्र की सत्ता में मंत्री रहने के अनुभव के बाद जब उन्हें दिल्ली में संगठन की जिम्मेदारी मिली तो उन्होंने चुनावी प्रबंधन और पार्टी के अंदरूनी समन्वय पर फोकस किया.

बिहार ने दिलाई राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान

तावड़े को राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी रणनीतिकार के तौर पर पहचान मिलने में बिहार की भूमिका महत्वपूर्ण रही. 2022 में उन्हें बिहार का प्रभारी बनाया गया था. इसके बाद बिहार में बीजेपी और उसके सहयोगियों के बीच संगठनात्मक तालमेल और चुनावी रणनीति में उनकी भूमिका चर्चा में रही. बिहार में काम करने के दौरान सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे और संगठनात्मक स्तर पर तालमेल जैसे मामलों को संभालना उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी थी. यही अनुभव अब उत्तर प्रदेश में उनके काम आ सकता है.

अब यूपी की बारी, 2027 की सबसे बड़ी परीक्षा

बीजेपी ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया है. उनके साथ जगदीश पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी का यह फैसला ऐसे समय आया है जब बीजेपी अपने राष्ट्रीय संगठन में बदलाव के साथ महत्वपूर्ण राज्यों की चुनावी तैयारियों को भी तेज कर रही है. उत्तर प्रदेश बीजेपी के लिए इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य की विधानसभा की 403 सीटें हैं और यहां का राजनीतिक प्रदर्शन राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालता है. ऐसे में तावड़े के सामने सिर्फ चुनावी रणनीति तैयार करने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय रखने और अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत करने की भी जिम्मेदारी होगी.

यूपी में तावड़े के सामने क्या होंगी बड़ी चुनौतियां?

तावड़े की नई जिम्मेदारी को सिर्फ एक संगठनात्मक नियुक्ति के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. उनके सामने कई स्तरों पर चुनौतियां होंगी. पहली चुनौती 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में नई ऊर्जा भरने की होगी. दूसरी चुनौती सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने की होगी. तीसरी चुनौती अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच बीजेपी के समर्थन को मजबूत करने की होगी. खास तौर पर गैर-यादव ओबीसी और पार्टी के पारंपरिक समर्थक वर्ग के बीच संगठन को और मजबूत करना उनके एजेंडे का अहम हिस्सा हो सकता है. इसके अलावा 2027 के चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना, बूथ स्तर के संगठन को मजबूत करना और सहयोगी दलों के साथ तालमेल भी उनके लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां रहेंगी.

तावड़े की सबसे बड़ी ताकत क्या है?

तावड़े की राजनीति की सबसे बड़ी पहचान उनका संगठनात्मक अनुभव माना जाता है. उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत की, महाराष्ट्र बीजेपी में लंबे समय तक संगठन का काम किया और फिर राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की जिम्मेदारियां संभालीं. उनकी आधिकारिक प्रोफाइल भी उन्हें दबाव में शांत रहने, संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग वर्गों के लोगों के साथ संपर्क बनाने वाला नेता बताती है. यही वजह है कि 2019 के बाद महाराष्ट्र की सक्रिय राजनीति से बाहर होने के बावजूद वह राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बड़ी जिम्मेदारियां हासिल करते गए.

राज्य की राजनीति से राष्ट्रीय संगठन तक लंबा सफर

विनोद तावड़े का राजनीतिक सफर कई पड़ावों से होकर गुजरा है. 1980 में उन्होंने एबीवीपी के साथ सक्रिय रूप से काम शुरू किया. इसके बाद संगठन में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं. 1995 में महाराष्ट्र बीजेपी के महासचिव बने और 1999 में मुंबई बीजेपी के अध्यक्ष बने. वह इस पद पर पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के नेताओं में शामिल थे. 2002 में वह महाराष्ट्र विधान परिषद पहुंचे और 2011 में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने. 2014 में विधानसभा चुनाव जीतकर महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बने. 2019 में टिकट कटने के बाद उनका राजनीतिक रास्ता दिल्ली की ओर मुड़ा और 2021 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बन गए. 2026 में उन्हें महाराष्ट्र से राज्यसभा के लिए भी चुना गया, जिससे उनका संसदीय करियर भी राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ा.

यूपी में साबित करनी होगी संगठन की क्षमता

विनोद तावड़े की कहानी को सिर्फ एक नेता के राजनीतिक कमबैक के तौर पर देखना अधूरा होगा. 2019 में महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति से बाहर होने के बाद उन्होंने संगठन के रास्ते राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बनाई. अब उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी उनके सामने एक नया लक्ष्य लेकर आई है. बिहार के बाद यूपी जैसे बड़े राज्य में चुनावी जिम्मेदारी तावड़े के संगठनात्मक कौशल की सबसे बड़ी परीक्षा होगी. बीजेपी के लिए भी यह नियुक्ति इसलिए अहम है क्योंकि पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ उत्तर प्रदेश में अपने संगठन और चुनावी रणनीति को नए सिरे से धार देने की तैयारी में है.

sharma ranjana

Recent Posts

जेकेसी फाउंडेशन ने लॉन्च किया ‘ब्रिलियंटली डिस्लेक्सिक’ अभियान

पहल का उद्देश्य स्कूलों, उच्च शिक्षा संस्थानों और कार्यस्थलों में डिस्लेक्सिया के प्रति जागरूकता बढ़ाना…

Last Updated: October 20, 2026 12:07:18 IST

एलजी इंडिया ने दिवाली पर ‘सेलिब्रेशन ऑफ ट्रस्ट’ ऑफर्स की घोषणा की

चुनिंदा मॉडल्स पर 26% तक का कैशबैक, ₹888 से शुरू होने वाली EMI, जीरो डाउन…

Last Updated: October 20, 2026 11:52:26 IST

पारूल विश्वविद्यालय, गोवा में परंपरा और एकजुटता के साथ मनाया गया सांस्कृतिक नवरात्रि उत्सव

पणजी (गोवा), 19 अक्टूबर: एक कैंपस में होनेवाली संस्कृति की समृद्धि को दर्शाते हुए पारूल…

Last Updated: October 20, 2026 11:37:27 IST

Tiger Shroff Firing Case: कैलिफोर्निया से कौन चला रहा था पूरा खूनी खेल? 34 हजार की दी सुपारी, फरार होने का प्लान भी था तैयार

Tiger Shroff Firing Case: कोटा पुलिस ने टाइगर श्रॉफ से जुड़ी कथित शूटआउट साजिश में…

Last Updated: October 20, 2026 11:13:28 IST

Silver Rate Today: चांदी हुई महंगी या सस्ती? दशहरे पर खरीदारी से पहले चेक करें नए भाव

Silver Rate Today 20 Oct 2026: दशहरे पर चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है.…

Last Updated: October 20, 2026 10:47:41 IST

Gold Price Today 20 October 2026: दशहरे पर सोने की कीमतों में बड़ा उलटफेर, खरीदने से पहले चेक करें 24K, 22K और 18K के भाव

Gold Rate Today 20 October 2026: दशहरे पर सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी है.…

Last Updated: October 20, 2026 10:11:46 IST