Doctor Suicide Case: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय मेडिकल कॉलेज की छात्रा डॉ. तन्वी सुसाइड मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. शिकायत मिलने के साथ ही डॉ. तन्वी सुसाइड मामले की पुलिस ने जांच तेज कर दी है. जांच की कड़ी में पुलिस ने अब मेडिकल कॉलेज को नोटिस जारी कर छाता तन्वी के एडमिशन से लेकर अब तक की सारी जानकारी मांगी है. पुलिस घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, जिसे सही तथ्यों और सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस छात्रों के मोबाइल की तलाश में भी जुटी है, जो पिता के पास है. पुलिस के अनुसार, डा. तन्वी के पिता मोबाइल को अपने साथ ही ले गए. पुलिस का कहना है कि डॉ. तन्वी के मोबाइल फोन से कुछ साक्ष्य मिल सकते हैं, जो मामले को सुलझाने में मददगार साबित होंगे.
यहां पर बता दें कि 24 मार्च, 2026 की रात के दौरान डॉ. तन्वी ने कार के अंदर इंजेक्शन लगाकर सुसाइड कर लिया. सबसे पहले पिता ने बेटी को कार में देखा. इसके बाद उसे अस्पताल लेकर गए जहां उनकी मौत हो गई. डॉ. तन्वी की मौत को लेकर परिजनों ने मेडिकल कॉलेज की एचओडी पर गंभीर आरोप लगाए थे. इस संबंध में पुलिस ने बृहस्पतिवार (27 मार्च, 2026) को एचओडी के बयान भी दर्ज किए थे.
हरियाणा के अंबाला की रहने वाली और देहरादून के श्री गुरु राम राय (SGRR) मेडिकल कॉलेज में एमएस (MS) की छात्रा डॉ. तन्वी के सुसाइड मामले में आखिरी ऑडियो सामने आया है. इसमें वह HOD कह रही है कि ‘मैम! किस-किस को खुश करूं? सुसाइड से पहले डॉ. तन्वी ने अपनी विभाग अध्यक्ष (HOD) डॉ. प्रियंका गुप्ता के साथ हुई करीब आधे घंटे की बातचीत रिकॉर्ड की थी. यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है.
क्या कहा पिता ने
डॉ. तन्वी के पिता ललित मोहन का कहना है कि उन्होंने बेटी से 24 मार्च की रात को एक घंटा बात की थी. परेशान तन्वी रोते हुए कहा था कि पापा अब बहुत परेशान हो गई हूं. अब यह रिकॉर्डिंग मैनेजमेंट को दिखानी ही पड़ेगी. बेटी की परेशानी को देखते हुए पिता ललित मोहन घर से यानी अंबाला से देहरादून के लिए निकले, लेकिन डॉ. तन्वी ने मौत को गले लगा लिया.
दो बार सुसाइड की कोशिश कर चुकी थी डॉ. तन्वी
डा. उत्कर्ष शर्मा (प्राचार्य श्री गुरु राम राय इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज देहरादून) का कहना है कि उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जा चुका है. उनकी मानें तो डा. तन्वी पूर्व में भी दो बार आत्महत्या का प्रयास कर चुकी थीं. उनका मानसिक स्वास्थ्य का उपचार चल रहा था. HOD डा. प्रियंका गुप्ता की ओर से किसी तरह से परेशान करने का तथ्य सामने नहीं आया है.