पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया से डाउन सप्तक्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में तैनात एक टीटीई का यात्रियों से रिश्वत लेते हुए वीडियो रिकॉर्ड हो गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. वीडियो में टीटीई खुलेआम यात्रियों से 100, 200 और 300 रुपये वसूलते दिखाई दे रहे हैं.
सप्तक्रांति एक्सप्रेस में रिश्वत लेते हुए टीटीई का वीडियो वायरल
सरकारी कर्मचारियों और सरकारी विभाग में घूसखोरी कोई नई बात नहीं है. इसके खिलाफ चाहे कितने भी नियम आ जाएं, लेकिन लोग अपने काम के लिए रिश्वत देने में नहीं हिचकते और अधिकांश सरकारी कर्मचारी रिश्वत लेने में. ऐसा ही एक वाकया सप्तक्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में देखने को मिला जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.
पश्चिम चंपारण जिले के बेतिया से डाउन सप्तक्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में तैनात एक टीटीई का यात्रियों से रिश्वत लेते हुए वीडियो रिकॉर्ड हो गया, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. इस घटना ने रेल यात्रियों और आम जनता में व्यापक आक्रोश पैदा कर दिया है. वीडियो में टीटीई खुलेआम यात्रियों से 100, 200 और 300 रुपये वसूलते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर #TTIBriberyBettiah जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे.
वायरल वीडियो में साफ दिखता और सुनाई देता है कि जनरल बोगी का टिकट लेकर स्लीपर बोगी में यात्रा कर रहे यात्रियों पर टीटीई जुर्माना लगाने के बजाय रिश्वत ले रहा है. वह यात्रियों को आश्वासन देता नजर आता है, "मुजफ्फरपुर तक हम इसी ट्रेन में हैं, कोई बात नहीं. कोई पूछने वाला नहीं है. अगले बोगी में हम हैं, बीच में कहीं भी उतर जाइए, कोई दिक्कत नहीं." यह हरकत रेलवे नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि बिना टिकट या गलत बोगी में यात्रा पर जुर्माना वसूलना अनिवार्य होता है.
उसी ट्रेन में यात्रा कर रहे एक यात्री ने इस भ्रष्टाचार को पकड़ने के लिए चुपके से वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया. वीडियो में टीटीई बिना किसी हिचकिचाहट के नोट गिनते और जेब में डालते हुए कैद हो गया. यह घटना बेतिया स्टेशन के आसपास हुई, जो सप्तक्रांति एक्सप्रेस के प्रमुख पड़ावों में से एक है.
रेलवे के अनुसार, स्लीपर क्लास का टिकट न होने पर यात्रियों को जुर्माना देना पड़ता है, जो बेसिक किराए का 50% से लेकर दोगुना तक हो सकता है. लेकिन यहां टीटीई ने जुर्माना वसूलने के बजाय खुद की जेब में पैसे डाले. इससे रेलवे को राजस्व का सीधा नुकसान हुआ, साथ ही ऐसी प्रथा यात्रियों के बीच गलत संदेश देती है और नियमों की अवहेलना को बढ़ावा देती है. ट्रेनों में भीड़भाड़ के कारण टीटीई अक्सर ऐसे अवसरों का फायदा उठाते हैं.
यह पहला मामला नहीं है. रेलवे में टीटीई की रिश्वतखोरी की शिकायतें अक्सर सामने आती रहती हैं, खासकर भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में. सरकार ने डिजिटल टिकटिंग और आरक्षण सिस्टम मजबूत किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर अमल की कमी बनी हुई है. यात्रियों को सलाह दी जाती है कि ऐसी घटनाओं में वीडियो बनाएं, हेल्पलाइन 139 पर शिकायत करें. रेलवे ने पहले भी वायरल मामलों में निलंबन जैसी कार्रवाई की है, लेकिन स्थायी सुधार जरूरी है.
हालांकि इसका दूसरा पहलू ये भी है कि लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए ट्रेन की संख्या कम है. सारी टिकटें बुक हो जाती हैं और जब वेटिंग टिकट कंफर्म नहीं होता तो यात्री मजबूर हो जाते हैं. अत्यधिक भीड़ की वजह से कभी-कभी जनरल बोगी में लोगों को जगह नहीं मिलती तो वो रिश्वत देकर सफर करने में ही भलाई समझते हैं. इसलिए इस भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए ट्रेनों की संख्या बढ़ाया जाना भी जरूरी है.
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