दिल्ली जल संकट: राजधानी दिल्ली में लोगों का जीवन दिन-ब-दिन संकटग्रस्त होता जा रहा है. पहले खराब हवा अब दूषित पानी लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है.
यमुना नदी में अमोनिया का बढ़ता स्तर राजधानी में लोगों को साफ़ पानी की बूंद के लिए तरसा सकता है. यह स्थिति और बदतर तब हो गई जब हरियाणा सरकार ने मुनक नहर की दिल्ली शाखा को मरम्मत कार्यों की वजह से कुछ दिन के लिए बंद कर दिया है. दिल्ली में जल संकट के बीच लाखों लोग बोतलबंद पानी या निजी टैंकरों पर निर्भर हैं.
संकट के मुख्य कारण
यमुना नदी में अमोनिया का स्तर 3 पीपीएम के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है, जो दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के शोधन संयंत्रों की क्षमता से कहीं अधिक है. बता दें कि दिल्ली जल बोर्ड के शोधन संयंत्रों की क्षमता 1 पीपीएम तक ही है. सर्दियों में नदी का बहाव कम होने से प्रदूषण बढ़ गया है, जिसमें हरियाणा से औद्योगिक कचरा भी जिम्मेदार है. मुनक नहर की मरम्मत 20 जनवरी से शुरू होकर 4 फरवरी 2026 तक चलेगी, जिससे साफ पानी की आपूर्ति रुकी हुई है. वजीराबाद प्लांट पूरी तरह बंद है, जबकि हैदरपुर प्लांट की क्षमता बहुत अधिक है.
प्रभावित इलाके
उत्तर दिल्ली, पश्चिम, दक्षिण-पश्चिम और मध्य दिल्ली जल संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. द्वारका, नांगलोई की सप्लाई भी पूरी तरह बंद है, जिससे उस क्षेत्र के निवासी बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं. वहीं सुभाष नगर और कीर्ति नगर के नल सूखे पड़े हैं. लोग खाना पकाने और नहाने के लिए कैन के पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. DJB टैंकर सेवा पर भी दबाव बढ़ गया है, लेकिन उनसे मिलने वाली जल आपूर्ति अपर्याप्त है. रोजाना 1000 MGD जल की जरूरत है, लेकिन इसकी तुलना में साफ़ जल का उत्पादन आधा हो गया है. दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने लोगों से पानी बचाने की अपील की है. अमोनिया हटाने की आधुनिक सुविधा न होने से प्लांट फेल होने की कगार पर हैं.
प्रशासनिक कदम
दिल्ली जल बोर्ड ने मुनक नहर मरम्मत को अस्थायी रूप से रोक दिया है, लेकिन हरियाणा से सामान्य बहाव चालू होने तक इंतजार करना पड़ेगा. टैंकर हेल्पलाइन सक्रिय है, लेकिन मांग अधिक होने की वजह से आपूर्ति पर्याप्त नहीं हो पा रही है.