West Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है. पिछले विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली थी. जिसमें टीएमसी को 213 और बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं. वहीं, कांग्रेस और वामदलों को एक भी सीट नहीं मिली थी. इस बीच, 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर चुनाव को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है. जिसको लेकर सभी पार्टियों ने कमर कसनी शुरू कर दी है.
ऐसे में आइए आज हम बंगाल के उन 5 मुद्दों की चर्चा करेंगे. जिसके दम पर कोई भी पार्टी विधानसभा चुनाव 2026 में बढ़त बना सकती है.
पश्चिम बंगाल की 5 बड़ी समस्या क्या हैं?
पश्चिम बंगाल की 5 बड़ी समस्याओं की बात करें तो पहली सबसे बड़ी समस्या पश्चिम बंगाल का लॉ एंड ऑर्डर है. दूसरी सबसे बड़ी समस्या महिलाओं के प्रति अपराध की घटना में लगातार हो रही वृद्धि हैं. तीसरी सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है. जिसकी वजह से युवाओं में हताशा पैदा हो रही है. चौथी सबसे बड़ी समस्या राज्य में बढ़ती बेरोजगारी है. इसके अलावा, पश्चिम बंगाल की पांचवी सबसे बड़ी समस्या घुसपैठ है. विपक्षी दल और केंद्र में सत्ता पर काबिज बीजेपी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में बहुत बड़ी मात्रा में बांग्लादेशी और रोहिंग्या बसे हुए हैं. जिन्हें सत्ताधारी दल टीएमसी का समर्थन प्राप्त है.
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वामदलों ने कैसे 34 साल तक पश्चिम बंगाल में शासन किया?
सीपीआई(एम) ने भूमि सुधारों को लागू करके और त्रि-स्तरीय पंचायती राज के माध्यम से स्थानीय स्वशासन का एक विकेंद्रीकृत मॉडल स्थापित करके और जन-हितैषी शासन का एक शानदार उदाहरण प्रस्तुत किया. इस पहल ने लाखों ग्रामीण गरीबों को सशक्त बनाया है और उनके जीवन को हमेशा के लिए बेहतर बना दिया. धर्मनिरपेक्षता की रक्षा करने, लोकतांत्रिक अधिकारों को सुरक्षित रखने और सार्वजनिक जीवन में शुचिता बनाए रखने के मामले में भी इसका रिकॉर्ड बेजोड़ है. पश्चिम बंगाल की वाम मोर्चा सरकार पूरे देश में प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों के लिए प्रेरणा और शक्ति का स्रोत बनी रही. इन्हीं सब मुद्दों के दम पर वाम दलों ने 1977 से लेकर 2011 तक बंगाल पर राज किया.
टीएमसी ने बीजेपी और कांग्रेस को कैसे सत्ता से रखा दूर?
साल 2011 मेें पश्चिम बंगाल की सत्ता पर ममता बनर्जी ने कब्जा किया और पिछले 15 सालों से कांग्रेस, सीपीआई(एम) और बीजेपी को सत्ता से दूर रखे हुए है. ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वामपंथी पकड़ को तोड़ा और बाद में एक लोकप्रिय नेता की भूमिका को रणनीतिक राजनीतिक दांव-पेचों के साथ मिलाकर बीजेपी का अब तक मुकाबला कर रही है. ममता बनर्जी ने बंगाल निजेर मेये (बंगाल की अपनी बेटी), लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाएं, स्ट्रीट फाइटर वाली छवि, रणनीतिक गठबंधन और बीजेपी के खिलाफ नैरेटिव सेट करके ममता बनर्जी अब तक कांग्रेस, बीजेपी और वामदलों को बंगाल की सत्ता से दूर रखे हुए है.