Congress West Bengal Election: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) को लेकर सभी पार्टियों की तैयारी अपने चरम पर है. सभी अपने-अपने चुनाव प्रचार में लगे हुए हैं. इसको लेकर कांग्रेस ने भी अपनी-अपनी तैयारी शुरू कर दी है. कांग्रेस पश्चिम बंगाल में लगातार गिरती अपनी साख को हासिल करने में जुटी है. इसी कड़ी में कांग्रेस ने एक बार फिर से अकेले चुनाव लड़ने का निर्णय लिया है.
कांग्रेस ने वामदलों से नाता तोड़कर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. जिसको लेकर 284 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है.
अधीर रंजन चौधरी भी चुनावी मैदान में
2024 के लोकसभा चुनाव में हारने के बाद कांग्रेस ने अधीर रंजन चौधरी को विधानसभा चुनाव में बहरामपुर से अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस भले ही अकेले दम पर चुनाव जीत नहीं सकती है और पश्चिम बंगाल में अकेले दम पर सरकार बनाने की स्थिति में नजर नहीं आ रही है. ऐसे में कांग्रेस का मुख्य फोकस कुछ सीटों पर जीत हासिल कर अपनी खोई हुई जनाधार को हासिल करना चाहेगी. इसलिए कांग्रेस ने बहरामपुर से अधीर रंजन चौधरी, मालतीपुर से मौसम नूर और सुजापुर से अब्दुल हन्नान जैसे प्रमुख नेताओं को टिकट दिया है. ताकि 2-3 सीटें जीतकर कांग्रेस अपनी स्थिति में सुधार कर सके.
पिछले चुनाव में कांग्रेस का क्या हाल रहा?
1982 के चुनाव में कांग्रेस को 35.47, 1987 में 41.81, 1991 में 35.11, 1996 में 39.48, 2001 में 7.98, 2006 में 14.71, 2011 में 9.09, 2016 में 12.25 और 2021 में 9.32 प्रतिशत वोट मिले. 1982 से लेकर अब तक कांग्रेस का वोट शेयर प्रतिशत इस प्रकार रहा है.
कांग्रेस के पतन की शुरूआत कब हुई?
पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के पतन की बात करें तो इसकी शुरुआत 1977 से हुई, जब ज्योति बसु के नेतृत्व में कम्युनिस्टों ने राज्य में सत्ता संभाली. सिद्धार्थ शंकर रे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद कांग्रेस मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई. कांग्रेस के खिलाफ बागी हुई ममता बनर्जी का प्रभाव लगातार बढ़ता गया और कांग्रेस का पतन होता गया. धीरे-धीरे कांग्रेस पश्चिम बंगाल में हाशिए पर आ गई. 2001 में टीएमसी ने कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष का दर्जा छीन लिया. जब 2011 में टीएमसी की सरकार बनी तो सीपीएम नेता सूर्यकांत मिश्रा नेता प्रतिपक्ष बने. हालांकि कांग्रेस ने 2016 में 44 सीटें हासिल की और मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल किया.
बीजेपी का हुआ उदय
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन किया और 2016 में 3 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2021 के विधानसभा चुनाव में 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बनीं. लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और वामदलों को एक भी सीट नसीब नहीं हुई. 2016 में 44 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा हासिल करने वाली कांग्रेस 2021 के विधानसभा चुनाव में शून्य पर सिमट गई. अब कांग्रेस 2026 के विधानसभा चुनाव में कुछ सीटें जीतकर अपनी खोई हुई इज्जत हासिल करना चाह रही है.