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28 की उम्र में निभाया 65 साल के बुजुर्ग का किरदार, पहली ही फिल्म में जीत लिया बेस्ट एक्टर अवॉर्ड, जानें कौन हैं ये एक्टर?

अनुपम खेर सारांश फिल्म: अनुपम खेर का फ़िल्मी करियर 1984 में महेश भट्ट की फ़िल्म सारांश से शुरू हुआ. इस फ़िल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल किया था.

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Anupam Kher Saraansh Movie: मशहूर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने अपनी दमदार एक्टिंग से पूरी इंडस्ट्री में अपने नाम का लोहा मनवाया है. चाहे वह किसी कॉमेडी का हो, विलन का हो या फिर महज 28 साल की उम्र में निभाया गया एक बूढ़े पिता का. खेर ने अपने हर रोल को पूरी तरह जस्टिफाई किया. उन्हें चैलेंज पसंद हैं, और इसीलिए उनका करियर 40 साल से ज़्यादा समय से अपने पीक पर है. उनकी हर फ़िल्म में एक अलग स्टाइल, एक अलग पैशन और एक अलग साइड दिखाई देती है.  
 
शिमला, हिमाचल प्रदेश में जन्में अनुपम खेर एक कश्मीरी पंडित परिवार से हैं. उनके पिता, पुष्कर नाथ खेर, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में क्लर्क थे, और उनकी मां, दुलारी खेर, एक होममेकर थीं. उन्हें छोटी उम्र से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी, इसलिए उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और चंडीगढ़ में पंजाबी यूनिवर्सिटी से इंडियन ड्रामा की पढ़ाई की. बाद में, उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में भी एडमिशन लिया. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि उनकी पहली फिल्म कौन सी थी, जिसमें उन्होंने 28 साल के होने के बाद भी एक रिटायर बूढ़े का रोल निभाया.
 

28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल

अनुपम खेर का फ़िल्मी करियर 1984 में महेश भट्ट की फ़िल्म सारांश से शुरू हुआ. इस फ़िल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल किया था. लोग हैरान थे कि उन्होंने इतनी कम उम्र में ऐसा रोल कैसे कर लिया. जब भी कोई उनसे यह सवाल पूछता, तो अनुपम बस मुस्कुराते हुए कहते कि यह एक फ़िल्म है, यह जादू है! एक्टिंग में उनकी ऐसी महारत थी. सारांश ने खेर को बेस्ट एक्टर कैटेगरी में उनका पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. 
 

क्या थीं फिल्म की कहानी?

यह फिल्म एक रिटायर्ड स्कूल टीचर और उसकी पत्नी की ज़िंदगी में होने वाली घटनाओं के बारे में है, जब उनके बेटे की लूटपाट की एक घटना में जान चली जाती है. रिटायर्ड हेडमास्टर बी.बी. प्रधान को न्यूयॉर्क में अपने इकलौते बेटे की मौत की दुखद घटना का सामना अपनी दुखी पत्नी पार्वती के साथ करना पड़ता है. बेटे की इनकम के बिना, कपल एक कमरा किराए पर लेने का फैसला करता है, लेकिन जल्द ही वे खुद को अपनी छोटी मेहमान सुजाता के मुश्किल मामलों में उलझा हुआ पाते हैं, जिसके खतरनाक और दूरगामी नतीजे होते हैं.  भट्ट की डायरेक्ट की हुई इस फिल्म में सोनी राजदान और रोहिणी हट्टंगड़ी भी हैं.

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28 की उम्र में निभाया 65 साल के बुजुर्ग का किरदार, पहली ही फिल्म में जीत लिया बेस्ट एक्टर अवॉर्ड, जानें कौन हैं ये एक्टर?

अनुपम खेर सारांश फिल्म: अनुपम खेर का फ़िल्मी करियर 1984 में महेश भट्ट की फ़िल्म सारांश से शुरू हुआ. इस फ़िल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल किया था.

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Anupam Kher Saraansh Movie: मशहूर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने अपनी दमदार एक्टिंग से पूरी इंडस्ट्री में अपने नाम का लोहा मनवाया है. चाहे वह किसी कॉमेडी का हो, विलन का हो या फिर महज 28 साल की उम्र में निभाया गया एक बूढ़े पिता का. खेर ने अपने हर रोल को पूरी तरह जस्टिफाई किया. उन्हें चैलेंज पसंद हैं, और इसीलिए उनका करियर 40 साल से ज़्यादा समय से अपने पीक पर है. उनकी हर फ़िल्म में एक अलग स्टाइल, एक अलग पैशन और एक अलग साइड दिखाई देती है.  
 
शिमला, हिमाचल प्रदेश में जन्में अनुपम खेर एक कश्मीरी पंडित परिवार से हैं. उनके पिता, पुष्कर नाथ खेर, फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में क्लर्क थे, और उनकी मां, दुलारी खेर, एक होममेकर थीं. उन्हें छोटी उम्र से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी, इसलिए उन्होंने स्कूल छोड़ दिया और चंडीगढ़ में पंजाबी यूनिवर्सिटी से इंडियन ड्रामा की पढ़ाई की. बाद में, उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा में भी एडमिशन लिया. ऐसे में चलिए विस्तार से जानें कि उनकी पहली फिल्म कौन सी थी, जिसमें उन्होंने 28 साल के होने के बाद भी एक रिटायर बूढ़े का रोल निभाया.
 

28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल

अनुपम खेर का फ़िल्मी करियर 1984 में महेश भट्ट की फ़िल्म सारांश से शुरू हुआ. इस फ़िल्म में उन्होंने 28 साल की उम्र में 65 साल के पिता का रोल किया था. लोग हैरान थे कि उन्होंने इतनी कम उम्र में ऐसा रोल कैसे कर लिया. जब भी कोई उनसे यह सवाल पूछता, तो अनुपम बस मुस्कुराते हुए कहते कि यह एक फ़िल्म है, यह जादू है! एक्टिंग में उनकी ऐसी महारत थी. सारांश ने खेर को बेस्ट एक्टर कैटेगरी में उनका पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. 
 

क्या थीं फिल्म की कहानी?

यह फिल्म एक रिटायर्ड स्कूल टीचर और उसकी पत्नी की ज़िंदगी में होने वाली घटनाओं के बारे में है, जब उनके बेटे की लूटपाट की एक घटना में जान चली जाती है. रिटायर्ड हेडमास्टर बी.बी. प्रधान को न्यूयॉर्क में अपने इकलौते बेटे की मौत की दुखद घटना का सामना अपनी दुखी पत्नी पार्वती के साथ करना पड़ता है. बेटे की इनकम के बिना, कपल एक कमरा किराए पर लेने का फैसला करता है, लेकिन जल्द ही वे खुद को अपनी छोटी मेहमान सुजाता के मुश्किल मामलों में उलझा हुआ पाते हैं, जिसके खतरनाक और दूरगामी नतीजे होते हैं.  भट्ट की डायरेक्ट की हुई इस फिल्म में सोनी राजदान और रोहिणी हट्टंगड़ी भी हैं.

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