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हेलिकॉप्टर, थाईलैंड विला…ED जांच में चौंकाने वाले खुलासे, 80 करोड़ रुपये के विदेशी खजाने का भंडाफोड़

Enforcement Directorate: प्रवर्तन निदेशालय ने हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में छह स्थानों पर छापे मारे, जिसमें इंपीरियल ग्रुप के चेयरमैन मनविंदर सिंह और सहयोगियों से जुड़ी 80 करोड़ रुपये से अधिक की अघोषित विदेशी संपत्ति का मालूम चला.

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FEMA Violation Case: ईडी यानी ‘प्रवर्तन निदेशालय’ ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में छापेमारी की है. 19 और 20 सितंबर को की गई इन छापेमारी में, दिल्ली स्थित इंपीरियल ग्रुप के चेयरमैन मनविंदर सिंह, उनकी पत्नी सगरी सिंह और उनके सहयोगियों के ठिकानों को निशाना बनाया गया. ED की जांच में पता चला कि मनविंदर सिंह और उनकी पत्नी ने विदेशों में कई कंपनियों और प्रॉपर्टी में गुप्त रूप से निवेश किया था.

इसमें सिंगापुर, दुबई, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और थाईलैंड में प्रॉपर्टी और बैंक अकाउंट शामिल थे. वे सिंगापुर में एरोस्टार वेंचर पीटीई लिमिटेड और दुबई में यूनाइटेड एरोस्पेस डीडब्ल्यूसी एलएलसी में हिस्सेदार पाए गए. जांच में दुबई की कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन, बिना गारंटी वाले लोन और बहुत ज्यादा सैलरी के भुगतान का एक नेटवर्क सामने आया. मई 2025 में, दुबई की कंपनी ने 7 करोड़ रुपये में एक रॉबिन्सन-66 हेलीकॉप्टर खरीदा, जिसे बाद में हिमाचल प्रदेश में औरामह वैली प्रोजेक्ट के लिए भारत लाया गया.

वो सामान खरीदें…जिसमें हमारे देश के लोगों का पसीना लगा हो; देशवासियों से PM मोदी की बड़ी अपील

संपत्ति कहाँ थी?

31 मार्च 2025 तक, दुबई की कंपनी की विदेशों में लगभग 38 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज थी. थाईलैंड के कोह समुई में ‘विला समायरा’ नाम का एक विला भी मिला, जिसकी कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये थी. ED के अनुसार, जब्त दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि इन घोषित विदेशी संपत्तियों की कुल कीमत 80 करोड़ रुपये से अधिक है.

नकद में 29 करोड़ रुपये जमा किए गए

छापेमारी के दौरान, ED को शिमला, हिमाचल प्रदेश में औरामह वैली प्रोजेक्ट से जुड़े नकद लेन-देन के सबूत मिले. इस प्रोजेक्ट में बेचे गए अपार्टमेंट की पेमेंट का कुछ हिस्सा नकद में लिया गया था। ED के रिकॉर्ड से पता चला कि लगभग 29 करोड़ रुपये नकद में जमा किए गए थे. एजेंसी को शक है कि यह पैसा हवाला नेटवर्क और दूसरे चैनलों के जरिए विदेश भेजा गया था. इस पैसे का इस्तेमाल विदेशी प्रॉपर्टी खरीदने या इसे अलग-अलग तरीकों से भारत वापस लाने के लिए किया गया.

ED ने क्या जब्त किया?

ED ने 50 लाख रुपये नकद, जिसमें पुराने 500 रुपये के नोट भी शामिल थे, और 14,700 अमेरिकी डॉलर जब्त किए. एजेंसी ने तीन बैंक लॉकर भी जब्त किए. कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंक पासबुक भी बरामद किए गए हैं. ED का कहना है कि जांच जारी है और इस नेटवर्क के बारे में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

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इसमें सिंगापुर, दुबई, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड और थाईलैंड में प्रॉपर्टी और बैंक अकाउंट शामिल थे. वे सिंगापुर में एरोस्टार वेंचर पीटीई लिमिटेड और दुबई में यूनाइटेड एरोस्पेस डीडब्ल्यूसी एलएलसी में हिस्सेदार पाए गए. जांच में दुबई की कंपनी के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन, बिना गारंटी वाले लोन और बहुत ज्यादा सैलरी के भुगतान का एक नेटवर्क सामने आया. मई 2025 में, दुबई की कंपनी ने 7 करोड़ रुपये में एक रॉबिन्सन-66 हेलीकॉप्टर खरीदा, जिसे बाद में हिमाचल प्रदेश में औरामह वैली प्रोजेक्ट के लिए भारत लाया गया.

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31 मार्च 2025 तक, दुबई की कंपनी की विदेशों में लगभग 38 करोड़ रुपये की संपत्ति दर्ज थी. थाईलैंड के कोह समुई में ‘विला समायरा’ नाम का एक विला भी मिला, जिसकी कीमत लगभग 16 करोड़ रुपये थी. ED के अनुसार, जब्त दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड से पता चलता है कि इन घोषित विदेशी संपत्तियों की कुल कीमत 80 करोड़ रुपये से अधिक है.

नकद में 29 करोड़ रुपये जमा किए गए

छापेमारी के दौरान, ED को शिमला, हिमाचल प्रदेश में औरामह वैली प्रोजेक्ट से जुड़े नकद लेन-देन के सबूत मिले. इस प्रोजेक्ट में बेचे गए अपार्टमेंट की पेमेंट का कुछ हिस्सा नकद में लिया गया था। ED के रिकॉर्ड से पता चला कि लगभग 29 करोड़ रुपये नकद में जमा किए गए थे. एजेंसी को शक है कि यह पैसा हवाला नेटवर्क और दूसरे चैनलों के जरिए विदेश भेजा गया था. इस पैसे का इस्तेमाल विदेशी प्रॉपर्टी खरीदने या इसे अलग-अलग तरीकों से भारत वापस लाने के लिए किया गया.

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ED ने 50 लाख रुपये नकद, जिसमें पुराने 500 रुपये के नोट भी शामिल थे, और 14,700 अमेरिकी डॉलर जब्त किए. एजेंसी ने तीन बैंक लॉकर भी जब्त किए. कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और बैंक पासबुक भी बरामद किए गए हैं. ED का कहना है कि जांच जारी है और इस नेटवर्क के बारे में और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

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