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कुक की नौकरी करने वाले को क्यों मिला करोड़ों का नोटिस? मामला जान दंग रह जाएंगे

Gwalior News: ग्वालियर स्थित टोल प्लाजा पर कुक की नौकरी करने वाले एक युवकों को आयकर विभाग ने करोड़ों रुपए जमा करने का नोटिस भेजा है।

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Gwalior Cook Income Tax Notice: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक साधारण युवक की जिंदगी अचानक उस समय उलट-पुलट हो गई, जब आयकर विभाग ने उसे 46 करोड़ रुपये जमा करने का नोटिस थमा दिया। टोल प्लाजा पर कुक की नौकरी करने वाला यह युवक अब न केवल सदमे में है, बल्कि न्याय की गुहार लगाते हुए अदालत तक पहुंच चुका है।

नोटिस से फैला हड़कंप

जानकारी के मुताबिक, टोल प्लाजा पर काम करने वाला रविंद्र, महज 8 हजार रुपये महीने की सैलरी पर गुजारा करता है। लेकिन हाल ही में उसे इनकम टैक्स विभाग से एक नोटिस मिला जिसमें कहा गया कि उसके नाम से 46 करोड़ रुपये का लेन-देन दर्ज है और अब उसे यह रकम चुकानी होगी। नोटिस में रकम जमा न करने पर कानूनी कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई।

मदद के लिए दर-दर भटका युवक

नोटिस मिलने के बाद रविंद्र और उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घबराए हुए रविंद्र ने पहले स्थानीय पुलिस से मदद मांगी, फिर साइबर सेल, क्राइम ब्रांच और यहां तक कि एसपी कार्यालय तक गुहार लगाई। लेकिन हर जगह उसे निराशा ही हाथ लगी। पुलिस ने साफ कह दिया कि मामला दिल्ली से जुड़ा है, इसलिए ग्वालियर पुलिस इसमें कुछ नहीं कर सकती।

रविंद्र ने बताया कि बिहार के रहने वाले शशिभूषण राय नामक व्यक्ति ने नौकरी के दौरान उसे अपने झांसे में लिया और दिल्ली स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) में उसके नाम से खाता खुलवाया। इसी खाते से करोड़ों रुपये का अवैध लेन-देन किया गया, जिसका जिम्मेदार अब रविंद्र को ठहराया जा रहा है।

कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

जब किसी भी सरकारी एजेंसी से न्याय नहीं मिला तो अंततः रविंद्र ने अपने वकील प्रद्युम्न सिंह भदौरिया के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। वकील का कहना है कि यह मामला साफतौर पर फर्जीवाड़े का है और जिम्मेदार असली अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय एक निर्दोष युवक को फंसाया जा रहा है।

सवालों के घेरे में सिस्टम

इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं जिसमें आखिरकार 8 हजार रुपये कमाने वाला एक साधारण कर्मचारी कैसे 46 करोड़ रुपये का मालिक बताया जा रहा है? क्या बैंक और इनकम टैक्स विभाग की जांच प्रणाली इतनी लापरवाह है कि कोई भी फर्जी अकाउंट खोलकर करोड़ों का लेन-देन कर सकता है? और सबसे अहम, क्या इसमें PNB बैंक, दिल्ली पुलिस और स्थानीय पुलिस की मिलीभगत को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है?

 

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