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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में पर्पल कैप जीतना किसी भी गेंदबाज के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होती है. यह उस खिलाड़ी को दी जाती है जिसने पूरे सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लिए हों. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि गेंदबाजों का प्रदर्शन शानदार रहता है, फिर भी टीम खिताब नहीं जीत पाती. आइए जानते हैं उन 5 गेंदबाजों के बारे में जिन्होंने सीजन में शानदार गेंदबाजी कर पर्पल कैप भी जीता लेकिन अपनी टीम को खिताब नहीं जिता सके.
लसिथ मलिंगा का 2011 सीजन बेहद खतरनाक रहा. उन्होंने 28 विकेट लेकर बल्लेबाज़ों की कमर तोड़ दी थी. उनकी सटीक यॉर्कर, खासकर डेथ ओवर में, बल्लेबाज़ों के लिए लगभग असंभव चुनौती बन गई थी. मलिंगा ने कई मैचों में अपनी टीम को मुश्किल हालात से निकाला और अकेले दम पर मैच जिताए. लेकिन इसके बावजूद मुंबई इंडियंस की टीम फाइनल में नहीं पहुंच पाई.
भुवनेश्वर कुमार ने हैदाराबाद के लिए 2017 में 26 विकेट लेकर लगातार दूसरी बार पर्पल कैप जीती, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. उनकी स्विंग गेंदबाज़ी नई गेंद से ही बल्लेबाज़ों को परेशान कर देती थी, वहीं डेथ ओवर में भी उनकी लाइन-लेंथ कमाल की रही. उन्होंने पूरे सीजन में कंसिस्टेंसी दिखाई, लेकिन सनराइजर्स हैदराबाद की बल्लेबाज़ी कई अहम मौकों पर फ्लॉप रही.
एंड्रयू टाय ने 2018 में 24 विकेट लेकर पर्पल कैप जीती. उनकी खासियत थी उनकी वैरिएशन स्लोअर बॉल, नकल बॉल और डेथ ओवर में चतुराई से गेंदबाज़ी करना. उन्होंने कई बार विपक्षी टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचने से रोका. लेकिन किंग्स इलेवन पंजाब की टीम प्लेऑफ तक भी नहीं पहुंच सकी.
कागिसो रबाडा ने 2020 में 30 विकेट लेकर पर्पल कैप जीती, जो IPL के बेहतरीन आंकड़ों में से एक है. उनकी तेज रफ्तार, बाउंस और सटीक लाइन-लेंथ ने बल्लेबाज़ों को लगातार दबाव में रखा. रबाडा ने दिल्ली कैपिटल्स को फाइनल तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई.
युजवेंद्र चहल ने 2022 में 27 विकेट लेकर पर्पल अपने नाम की. उन्होंने मिडिल ओवर्स में विकेट निकालकर विपक्षी टीम की रन गति को रोका. चहल की लेग स्पिन और उनकी चतुर गेंदबाज़ी ने राजस्थान रॉयल्स को कई मैच जिताए. उनकी हैट्रिक भी इस सीजन का खास आकर्षण रही. टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन वहां जीत नहीं सकी.