हाल ही में जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बाढ़ बहाली कार्यों को लेकर हंगामा मच गया. दो भाजपा विधायकों ने वॉकआउट कर सरकार पर जम्मू क्षेत्र के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है. दरअसल पिछले साल जम्मू-कश्मीर में आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, खासकर जम्मू क्षेत्र में. इस आपदा से निपटने के लिए केंद्र ने राहत पैकेज की घोषणा की थी.
वर्तमान वित्तीय वर्ष में धनराशि जारी होने पर विवाद हो रहा है. SDRF संयुक्त कोष है, लेकिन विधायक जम्मू को अधिक हिस्सा मिलने की मांग उठा रहे हैं, जिसकी वजह से सदन में हंगामा हुआ.
क्या है पूरा मामला
मंगलवार को विधानसभा में विपक्षी भाजपा विधायक राजीव जसरोतिया ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बाढ़ बहाली के लिए जारी, आवंटित और स्वीकृत धनराशि का घटकवार विवरण मांगा. उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने जवाब दिया कि केंद्र सरकार ने अभी तक कोई धन जारी नहीं किया है. हालांकि, राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) से 289.39 करोड़ रुपये जारी हुए हैं. इसके अलावा, आपदा प्रबंधन विभाग के तहत प्रत्येक जिले को 5 करोड़ रुपये (कुल 100 करोड़) कैपेक्स बजट से दिए गए. सरकारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि SDRF का 90% हिस्सा केंद्र का और 10% केंद्रशासित प्रदेश का है. इससे भाजपा विधायकों ने विरोध जताया और सदन में नारेबाजी हुई.
भाजपा विधायकों का आरोप
राजीव जसरोतिया ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले साल बाढ़ के बाद 212 करोड़ रुपये जारी होने की घोषणा की थी. उन्होंने पूछा कि 289 करोड़ में केंद्र का हिस्सा शामिल है या नहीं. जम्मू अधिक प्रभावित होने के बावजूद प्रत्येक जिले को बराबर 5 करोड़ देने पर आपत्ति जताई. पवन गुप्ता ने भी सरकार के रवैये पर सवाल उठाए. राजीव जसरोतिया का कहना है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने सदन से वॉकआउट किया. राजीव जसरोतिया के समर्थन में विधायक पवन गुप्ता ने भी सदन से वॉकआउट कर दिया था.
उपमुख्यमंत्री का जवाब
सुरिंदर चौधरी ने आरोपों को खारिज किया और विधायकों से तीखी बहस की. उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्रों में भेदभाव नहीं करती. “कश्मीर हो या जम्मू, बाढ़ का दर्द एक समान है. भाजपा का विवेक साफ नहीं है.” इससे सदन में हंगामा बढ़ गया.