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कौन था एक करोड़ का इनामी नक्सली अनल दा, मुठभेड़ में मारा गया, यहां जाने पूरा आपराधिक रिकॉर्ड

झारखंड के चाईबासा (Chaibasa) में एक करोड़ रुपये का इनामी नक्सली पतिराम माझी उर्फ अनल (Naxalite Patiram Majhi Alias Anal) दा मारा गया है. सीआरपीएफ (CRPF) के इस संयुक्त ऑपरेशन (Joint Operation) को नक्सल विरोधी अभियान को एक बड़ी सफलता के रूप में माना जा रहा है.

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Naxalite Patiram Majhi alias Anal Da, carrying a bounty of Rs 1 crore was killed: झारखंड के चाईबासा जिले में पुलिस को बड़ी सफलता हासिल हुई है. जहां,  सुरक्षाबलों ने एक भीषण मुठभेड़ में कुख्यात नक्सली नेता पतिराम माझी उर्फ अनल दा को ढेर कर दिया है. दरअसल, अनल दा पर झारखंड और पड़ोसी राज्यों की पुलिस ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. इसके साथ ही वह पिछले कई दशकों से नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा था और कई बड़ी हिंसक घटनाओं के मास्टरमाइंड में पूरी तरह से शामिल भी था. 

आखिर क्या है पूरा मामला?  

जानकारी के मुताबिक, सुरक्षाबलों को चाईबासा के सुदूर जंगलों में नक्सलियों के एक बड़े दस्ते की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी, फिर इसके बाद झारखंड पुलिस और CRPF (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) ने एक संयुक्त सर्च ऑपरेशन की शुरुआत की. जैसे ही सुरक्षाबल नक्सलियों के ठिकाने के करीब पहुंचे, नक्सलियों ने उन पर फायरिंग करना शुरू कर दिया. इसके अलावा जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और भीषण गोलीबारी के बीच अनल दा को मुठभेड़ के दौरान ढेर कर दिया. 

सुरक्षाबलों ने की इलाके की घेराबंदी 

अनल दा की मौत को झारखंड में माओवादी नेटवर्क की कमर टूटने के समान माना जा रहा है. तो वहीं, दूसरी तरफ वह भाकपा (माओवादी) की केंद्रीय समिति (Central Committee) का सदस्य था और संगठन के रणनीतिक निर्णयों में उसकी सबसे ज्यादा अहम भूमिका रहती थी. लेकिन, पुलिस के मुताबिक, इस मुठभेड़ में कुछ अन्य नक्सलियों के भी मारे जाने या घायल होने की संभावना जताई जा रही है.  वर्तमान में सुरक्षाबल इलाके की घेराबंदी कर शवों की तलाश और हथियार बरामदगी के लिए व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं. 

नक्सली गतिविधियों का था मुख्य सूत्रधार

पतिराम माझी उर्फ अनल दा का मारा जाना केवल एक नक्सली का अंत नहीं है, बल्कि यह झारखंड में माओवादी विचारधारा और उनके संगठनात्मक ढांचे के लिए एक अपूरणीय क्षति है. इसके साथ ही एक करोड़ रुपये का इनामी और केंद्रीय समिति का सदस्य होने के नाते, वह नक्सली गतिविधियों का मुख्य सूत्रधार की तरह काम करता था. तो वहीं,  उसकी मौत से न सिर्फ संगठन का मनोबल टूटेगा, बल्कि क्षेत्र में सक्रिय अन्य कैडरों के बीच भी भय और असुरक्षा का संचार होगा.

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