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ईरान के दर्द में शामिल है कश्मीर! बेवा बहन ने दान की पति की आखिरी निशानी, रूहानी जज़्बे को दुनिया ने किया सलाम!

कश्मीर की एक बुजुर्ग महिला ने ईरान के लोगों के प्रति अपनी एकजुटता दिखाते हुए एक ऐसा कदम उठाया है जिसने हर किसी की आंखों में आंसू ला दिए हैं, उन्होंने अपने पति की मृत्यु के 28 साल बाद भी उनकी याद में संभाल कर रखा गया सोना जेवर ईरान की मदद के लिए दान कर दिया, ईरान की जनता और वहां के प्रतिनिधियों ने इस 'पवित्र भावना' का तहे दिल से शुक्रिया अदा किया है और इसे कभी ना भुलाने वाला 'सहारा' बताया है.


Kashmiri Woman Donates Gold For Iran 2026: यह कहानी केवल एक दान की नहीं, बल्कि उस गहरे रूहानी जुड़ाव की है जो कश्मीर और ईरान के बीच सदियों से रहा है, कश्मीर की इस महिला के पति का इंतकाल 28 साल पहले हो गया था, तब से उन्होंने अपने पति की याद के तौर पर उनके दिए हुए सोने को सहेज कर रखा था, लेकिन जब उन्होंने ईरान के लोगों को मुश्किल दौर से गुजरते देखा, तो उन्होंने अपनी सबसे कीमती भावना को उनके नाम कर दिया ईरान की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि “बहन, आपके आंसू और आपकी पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सुकून का सबसे बड़ा जरिया हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा, यह घटना साबित करती है कि जब इंसानियत जागती है, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है और एक बेवा की दुआएं और उसकी संवेदनाएं सबसे बड़ा सहारा बन जाती हैं, इस निस्वार्थ प्रेम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कश्मीर की मिट्टी में कितनी मोहब्बत और हमदर्दी बसी है.

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Kashmiri Woman Donates Gold For Iran 2026: यह कहानी केवल एक दान की नहीं, बल्कि उस गहरे रूहानी जुड़ाव की है जो कश्मीर और ईरान के बीच सदियों से रहा है, कश्मीर की इस महिला के पति का इंतकाल 28 साल पहले हो गया था, तब से उन्होंने अपने पति की याद के तौर पर उनके दिए हुए सोने को सहेज कर रखा था, लेकिन जब उन्होंने ईरान के लोगों को मुश्किल दौर से गुजरते देखा, तो उन्होंने अपनी सबसे कीमती भावना को उनके नाम कर दिया ईरान की ओर से जारी संदेश में कहा गया है कि “बहन, आपके आंसू और आपकी पवित्र भावनाएं ईरान के लोगों के लिए सुकून का सबसे बड़ा जरिया हैं और इन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा, यह घटना साबित करती है कि जब इंसानियत जागती है, तो सोने की चमक फीकी पड़ जाती है और एक बेवा की दुआएं और उसकी संवेदनाएं सबसे बड़ा सहारा बन जाती हैं, इस निस्वार्थ प्रेम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कश्मीर की मिट्टी में कितनी मोहब्बत और हमदर्दी बसी है.

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