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Lohri 2026: आखिर कौन थे दुल्ला भट्टी? जिनकी गाथा के बिना अधुरी है लोहड़ी की आग, जानें लोकनायक की पूरी कहानी

Dulla Bhatti History on Lohri: आज पूरा देश लोहड़ी का पर्व मनाएगा, लेकिन क्या आप जानते है कि दुल्ला भट्टी कौन था, जिसकी कहानी सुनाए बगैर लोहड़ी का त्योहार फिका होता है. आइए जानें.

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Lohri 2026: भारत में लोहड़ी का त्योहार हर साल 13 जनवरी को बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जाता है. लोहड़ी के त्योहार पर लोग अलाव के चारों ओर परिक्रमा करते हैं. आग के चारों ओर घूमते हुए, वे तिल, गुड़, गजक (तिल और गुड़ से बनी मिठाई) और मूंगफली चढ़ाते हैं. वे कई गाने भी गाते हैं. ऐसा ही एक गाना है, ‘सुंदर मुंदरिये हो, तेरा कौन विचारा हो… दुल्ला भट्टी वाला हो…’ इस गाने में दुल्हा भट्टी का ज़िक्र है.  इस गाने और दुल्हा भट्टी की कहानी के बिना लोहड़ी का त्योहार अधूरा माना जाता है. ऐसे में चलिए विस्तार से समझते है कि लोहड़ी के दौरान दुल्ला भट्टी का जिक्र क्यों होता है और दुल्ला भट्टी कौन थे, जिनके बिना लोहड़ी का त्योहार अधूरा माना जाता है?

दुल्ला भट्टी कौन थे?

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब के लोग दुल्ला भट्टी को एक लोक नायक,एक विद्रोही योद्धा और गरीबों का रक्षक मानते हैं. उन्होंने मुगल शासन के खिलाफ डटकर मुकाबला किया. दुल्ला भट्टी का जन्म 16वीं सदी (1547) में पंजाब के संदल बार इलाके में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में फैसलाबाद है. वह एक राजपूत परिवार से थे. उनके पिता और दादा ने मुगलों की नीतियों का विरोध किया था, जिसके लिए उन्हें सज़ा मिली थी. इस पारिवारिक पृष्ठभूमि ने दुल्ला भट्टी में विद्रोही भावना भर दी. दुल्ला भट्टी को महिलाओं के सम्मान का रक्षक माना जाता है.

दुल्ला भट्टी की कहानी

जानकारी के मुताबिक, दुल्ला भट्टी की कहानी लोहड़ी के त्योहार के दौरान सुनाई जाती है. मुगल काल में, अकबर के शासन के दौरान, संदल बार में लड़कियों को अमीर व्यापारियों को बेच दिया जाता था. उस समय, दुल्ला भट्टी ने इन लड़कियों की रक्षा की. उन्होंने लड़कियों को व्यापारियों से बचाया और उनकी शादी करवाई. तब से, दुल्ला भट्टी को एक नायक माना जाता है. दुल्ला भट्टी लोगों को महिलाओं की रक्षा करना सिखाते हैं और उन्हें अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करते थें.

एक बार, दुल्ला भट्टी को सुंदरदास नाम के एक किसान की दो बेटियों, सुंदरी और मुंदरी की जबरदस्ती शादी की खबर मिली. तब दुल्हा भट्टी ने गांव में आग लगा दी और शादी रोक दी. उसके बाद, लड़कियों की शादी उनके माता-पिता की मर्ज़ी से हुई. दुल्ला भट्टी की यह कहानी लोहड़ी के त्योहार के दौरान सुनाई जाती है.

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