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क्या मेनोपॉज बना देता है महिलाओं को ज्यादा इरिटेबल? जानें हार्मोनल बदलाव, मानसिक असर और राहत पाने के आसान उपाय

Menopause Symptoms: मेनोपॉज सिर्फ शारीरिक बदलाव नहीं, बल्कि मूड स्विंग्स का भी समय होता है. मूड स्विंग्स इस प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा हैं. इसका असर मूड पर पड़ता है और चिड़चिड़ापन, उदासी, चिंता, थकान और ध्यान की कमी जैसी समस्याएं सामने आती हैं. नींद की कमी, हॉट फ्लैश और जीवन से जुड़ा तनाव इन भावनात्मक बदलावों को और बढ़ा देता है.

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Menopause Symptoms: मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन का स्तर कम होने लगता है, जिसका सीधा असर दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है. इस हार्मोनल बदलाव के कारण चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग्स, गुस्सा, बेचैनी और उदासी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. नींद की कमी, हॉट फ्लैश और रोजमर्रा का तनाव इन भावनात्मक बदलावों को और गंभीर बना देते हैं.

हालांकि मेनोपॉज महिलाओं को ‘ज्यादा इरिटेबल’ नहीं बनाता, बल्कि यह शरीर में हो रहे प्राकृतिक बदलावों का असर होता है. सही जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, योग-मेडिटेशन और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या काउंसलर की मदद से इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती है और इस दौर को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है.

मेनोपॉज के दौरान मूड स्विंग्स क्यों होते हैं?

मेनोपॉज महिला के जीवन का एक अहम पड़ाव होता है. यह वह समय है जब मासिक धर्म यानी पीरियड्स स्थायी रूप से बंद हो जाता है और शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव शुरू हो जाते हैं. यह बदलाव सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि मन और भावनाओं पर भी गहरा असर डालते हैं. इसी वजह से इस दौर में कई महिलाओं को मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन, उदासी या बेचैनी महसूस होती है.कुछ महिलाओं के लिए यह बदलाव सहज होता है, जबकि कुछ के लिए यह भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण बन सकता है.

हार्मोनल बदलाव और दिमाग पर असर

मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है. एस्ट्रोजन सिर्फ प्रजनन से जुड़ा हार्मोन नहीं है, बल्कि यह दिमाग में मौजूद केमिकल्स जैसे ‘सेरोटोनिन और नॉरएपिनेफ्रिन’ को भी प्रभावित करता है, जो मूड को संतुलित रखने में मदद करते हैं.जब इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो व्यक्ति को उदासी, चिंता, गुस्सा, थकान और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है. यही कारण है कि मेनोपॉज के समय मूड बार-बार बदलता रहता है.

 नींद की कमी और तनाव का संबंध

मेनोपॉज के दौरान ‘हॉट फ्लैश और नाइट स्वेट्स’ आम समस्या हैं. रात में बार-बार पसीने से नींद टूटना, शरीर और दिमाग दोनों को थका देता है. जब नींद पूरी नहीं होती, तो इसका सीधा असर मूड पर पड़ता है.लगातार नींद की कमी से चिड़चिड़ापन, बेचैनी, भूलने की समस्या और मानसिक थकावट बढ़ सकती है. इसके अलावा इस उम्र में जीवन से जुड़े सवाल, परिवार की जिम्मेदारियां और स्वास्थ्य की चिंता भी तनाव को बढ़ा देती है.

 मेनोपॉज में दिखने वाले आम भावनात्मक लक्षण

इस समय कई महिलाओं को बिना किसी कारण के उदासी महसूस होती है. कुछ को पहले से ज्यादा गुस्सा आने लगता है, तो कुछ छोटी-छोटी बातों पर भावुक हो जाती हैं. चिंता, घबराहट, आत्मविश्वास में कमी और नकारात्मक सोच भी आम लक्षण हैं.कुछ मामलों में डिप्रेशन या एंग्जायटी की समस्या भी उभर सकती है, खासकर उन महिलाओं में जिन्हें पहले मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां रही हों.

 इलाज और लाइफस्टाइल में बदलाव

मेनोपॉज के मूड स्विंग्स को संभालने के लिए इलाज और जीवनशैली में बदलाव दोनों जरूरी हैं. काउंसलिंग या थेरेपी भावनाओं को समझने और संभालने में काफी मददगार हो सकती है. कुछ मामलों में डॉक्टर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) की सलाह भी देते हैं, लेकिन यह डॉक्टर की निगरानी में ही लेना चाहिए.इसके अलावा नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और योग-मेडिटेशन जैसी गतिविधियां मन को शांत रखने में मदद करती हैं. अपनों से बात करना और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखना भी इस समय बहुत जरूरी होता है.

Disclaimer : प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर आपको केवल जागरूक करने के मकसद से लिखी गई है. हमने इसको लिखने में सामान्य जानकारियों की मदद ली है. INDIA News इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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