Patna Railway Station Racism Case: यह मामला सीधे तौर पर मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का है, सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, "चिंकी" या किसी के शारीरिक बनावट पर टिप्पणी करना एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें जेल की सजा का प्रावधान है कोई भी आम नागरिक सड़क या स्टेशन पर किसी दूसरे नागरिक से जबरन पहचान पत्र (Identity Proof) नहीं मांग सकता, यह निजता और सम्मान के साथ जीने के अधिकार का हनन है, उन युवतियों की तारीफ होनी चाहिए जिन्होंने अपमान सहने के बजाय आवाज उठाई, उनके इस कदम से अन्य लोगों को भी अपनी गरिमा के लिए लड़ने की प्रेरणा मिलेगी, पटना रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त स्थान पर ऐसी घटना होना सुरक्षा और निगरानी पर सवाल उठाती है, रेलवे प्रशासन (RPF/GRP) को इस महिला की पहचान कर तुरंत कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि समाज में सख्त संदेश जाए.