Palam Fire Tragedy: मां, जल्दी से मेरे साथ भागो! आग तेजी से फैल रही है. बुज़ुर्ग मां ने जवाब दिया, बेटी मैं तेजी से नहीं भाग पाऊंगी. तुम्हें तुरंत यहां से निकल जाना चाहिए. बेटी ने जिद की नहीं मां चाहे कुछ भी हो जाए मैं तुम्हें पीछे नहीं छोड़ूंगी. हम दोनों साथ मिलकर आग से बच निकलेंगे. और पलक झपकते ही आग ने विकराल रूप ले लिया. देखते ही देखते मां और बेटी दोनों की जिंदा जलकर मौत हो गई. शायद दिल्ली के पालम में उस इमारत के अंदर ऐसा ही दिल दहला देने वाला मंजर रहा होगा, जहां मंगलवार को एक भयानक आग लग गई थी. इमारत पूरी तरह से जलकर खाक हो गई है. इसके साथ ही नौ जानें भी चली गईं. यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि अपनी मां को बचाने की अपनी बेताब कोशिश में बेटी ने कितनी भीषण पीड़ा सही होगी.
इसी तरह कोई सिर्फ़ उस घटना का अंदाजा ही लगा सकता है जो मां के दिल को चीर गई होगी, जब उसने जान से भी अपनी प्यारी बेटी को अपनी आंखों के सामने दर्द से तड़पते देखा होगा. उनकी आपसी चीखें जरूर एक-दूसरे की रूह को भेद गई होंगी. इस बारे में सोचते ही रूह कांप उठती है.
पालम की आग में मां और बेटी की मौत
दिल्ली के पालम के साधनगर इलाके में लगी आग ने एक ही परिवार के नौ सदस्यों की जान ले ली. इस त्रासदी के बाद जहां एक तरफ फायर डिपार्टमेंट के हाइड्रोलिक लैडर सिस्टम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आग की लपटों के बीच परिवार ने खुद को बचाने के लिए जो बेताब कोशिशें की होंगी. उनके बारे में भी कई जानकारियां सामने आ रही हैं. मरने वालों में लाडो कश्यप भी शामिल हैं, जो कश्यप परिवार के मुखिया राजेंद्र कश्यप की पत्नी थीं. लाडो की बहन बाला पालम गांव में रहती हैं. घटना वाले दिन उन्हें भी सुबह-सुबह आग लगने की खबर मिल गई थी. वह उस इमारत की तरफ भागीं जहां उनकी बहन लाडो रहती थीं लेकिन इमारत के नीचे पहुंचने पर भी उन्हें लाडो की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई.
बेटी अपनी मां को बचाने के लिए रुकी रही
पड़ोसियों ने बताया कि लाडो शायद ही कभी बाहर निकलती थीं और अपना ज़्यादातर समय घर के अंदर ही बिताती थीं. परिवार के करीबी रिश्तेदारों ने बताया कि लाडो और उनकी बेटी हिमांशी दोनों दूसरी मंज़िल पर रहती थीं. सत्तर साल की लाडो तेजी से फैलती आग से बचने के लिए तीसरी मंज़िल तक नहीं पहुंच पाईं. अपनी मां को बचाने के एक निस्वार्थ प्रयास में लाडो की बेटी हिमांशी ने उनके साथ ही रुकने का फैसला किया. फिर दोनों जान बचाने की एक हताश कोशिश में बाथरूम की ओर भागीं. हालांकि, कॉस्मेटिक्स और प्लास्टिक के सामान की मौजूदगी से आग इतनी तेजी से फैली कि बाद में मां और बेटी दोनों के जले हुए शव एक-दूसरे के बगल में पड़े मिले.
आखिरी पल तक अपनी मां के साथ
रिश्तेदारों के अनुसार, हिमांशी अपनी मां को बचाने की एक बहादुराना कोशिश में आखिरी पल तक उनके साथ रही. आखिरी तक उनके साथ रही, जबकि तीसरी मंज़िल पर मौजूद परिवार के कुछ सदस्य बेताबी से मदद की गुहार लगा रहे थे. हिमांशी के शव की पहचान उसकी अंगूठी से हुई. मृतकों में लाडो उनकी बेटी हिमांशी, उनके बेटे कमल और प्रवेश, कमल की पत्नी आशु और उनके तीन बच्चे और अनिल की पत्नी दीपिका शामिल हैं. इस बीच दो भाई अनिल और सचिन जो इमारत से कूद गए थे, उनका इलाज इस समय अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है.
हाइड्रोलिक सीढ़ी के काम न करने की जांच
क्या हाइड्रोलिक सीढ़ियां खुल नहीं पाईं, जिसके कारण बचाव अभियान में देरी हुई? इस मामले में एक न्यायिक जांच पहले ही शुरू हो चुकी है. राजेंद्र कश्यप के दोस्त और बाजार के महासचिव, मुकेश वर्मा ने बताया कि एक हाइड्रोलिक सीढ़ी में खराबी आ जाने के कारण दूसरी सीढ़ी बुलानी पड़ी. इस बीच, उन्होंने और उनके दोस्तों ने पहली मंज़िल के शटर तोड़कर ऊपरी मंजिलों तक पहुंचने की कोशिश की. हालांकि, धुआं और आग इतनी तेज थी कि तीसरी मंजिल पर फंसे परिवार तक मदद पहुंचने में काफी देरी हो गई.
BJP और AAP में टकराव
नाम न बताने की शर्त पर एक दमकलकर्मी ने बताया कि जब पहली दमकल गाड़ी पहुंची, तो उसकी हाइड्रोलिक सीढ़ी बहुत छोटी साबित हुई. हालांकि, तब तक धुआं इतना घना हो चुका था कि ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोग अब दिखाई नहीं दे रहे थे. अब आम आदमी पार्टी (AAP) और BJP एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं. गुरुवार को पीड़ित राजेंद्र कश्यप की मौजूदगी में ही सौरभ भारद्वाज और स्थानीय भाजपा विधायक कुलदीप सोलंकी के बीच एक तीखी बहस छिड़ गई, जो बाद में हाथापाई में बदल गई.