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दिव्यांग होने के कारण पिता ने छोड़ा साथ, युवा पैडलर लक्ष्य ने पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में जीता कांस्य पदक

फरीदाबाद के 17 वर्षीय लक्ष्य गुप्ता ने इतिहास रचते हुए दुबई के पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में टेबल टेनिस के पैरा यूथ अंडर-17 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. उन्हें देशभर से बधाइयां मिल रही हैं.

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Para Athlete Lakshya Gupta: फरीदाबाद के 17 साल के लक्ष्य गुप्ता ने इतिहास रचा है. उन्होंने दुबई के पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में टेबल टेनिस के पैरा यूथ अंडर-17 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. उनकी इस उपलब्धि से उनका परिवार और पूरा देश व प्रदेश गर्वित है. उन्हें देशभर से बधाइयां दी जा रही हैं. एक इंटरव्यू में लक्ष्य ने बातचीत करते हुए बताया कि वो सही से बोल नहीं सकते हैं. वे आज इस मुकाम पर पहुंचकर गर्वित और खुश महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे साल 2028 में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाना चाहते हैं. वे इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

कौन हैं लक्ष्य गुप्ता?

बता दें कि लक्ष्य गुप्ता हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले हैं. वे खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी होशियार हैं. वो बीए फर्स्ट ईयर के छात्र हैं. वे 2028 में होने वाले ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाना चाहते हैं. लक्ष्य को फरीदाबाद के मानव रचना संस्थान और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रशिक्षित किया है. उन्हें M3M फाउंडेशन, आईएएस विक्र्रम सिंह और अग्रवाल वैश्य परिवार जैसी संस्थाओं से समर्थन मिला. 

दिव्यांग होने के कारण पिता ने छोड़ा साथ

वहीं लक्ष्य की मां ने एक इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि जब लक्ष्य का जन्म हुआ, तो हमें एक साल बाद पता चला कि वो दिव्यांग है. इसके कारण लक्ष्य के पिता ने मां और बेटे को छोोड़ दिया. इसके बाद मैं लक्ष्य को लेकर मायके चली आई. कुछ दिनों बाद फरीदाबाद आकर यहीं रहने लगी. यहां मैंने नौकरी के साथ ही लक्ष्य की परवरिश की. स्कूल में उसका एडडमिशन कराया. इसके बाद जब वो 10 साल का हुआ, तो किसी ने उसे टेबल टेनिस गिफ्ट किया. इसके बाद उसने टेबल टेनिस खेलना शुरू किया. उसने पूरा फोकस गेम पर लगाया और कई मेडल जीते. मेरी सैलरी कम थी और ट्रेनिंग दिलाना मेरे बजट से बाहर था, तब कई संस्थाओं ने मेरा सपोर्ट किया. उनके कारण ही लक्ष्य कई मेडल लेकर आया है. 

अब तक जीते कई मेडल्स

उन्होंने बताया कि साल 2021 और 2023 में हुए पैरा नेशनल चैंपियनशिप में टेबल टेनिस में गोल्ड मेडल जीता. 2023 में दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स गेम्स में उसने कांस्य पदक जीता. खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023 में बुखार होने के बावजूद भी उसने कांस्य पदक जीता. इसके अलावा उसने 15  साल की उम्र में अंडर-23 में एशिया में पहला स्थान हासिल कर रिकॉर्ड बनाया. 

तीन साल बाद भी नहीं मिली प्राइज मनी

लक्ष्य की मां ने सरकार से अपील की कि नीति के अनुसार जो प्राइज मनी और सुविधाएं मिलनी चाहिए, वो जल्द सुनिश्चित की जाएं. इसकी मदद से लक्ष्य और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि तीन साल बाद भी अब तक HTET या अन्य प्राइज मनी नहीं मिली है.

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दिव्यांग होने के कारण पिता ने छोड़ा साथ, युवा पैडलर लक्ष्य ने पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में जीता कांस्य पदक

फरीदाबाद के 17 वर्षीय लक्ष्य गुप्ता ने इतिहास रचते हुए दुबई के पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में टेबल टेनिस के पैरा यूथ अंडर-17 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. उन्हें देशभर से बधाइयां मिल रही हैं.

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Para Athlete Lakshya Gupta: फरीदाबाद के 17 साल के लक्ष्य गुप्ता ने इतिहास रचा है. उन्होंने दुबई के पैरा यूथ एशियन गेम्स 2025 में टेबल टेनिस के पैरा यूथ अंडर-17 कैटेगरी में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. उनकी इस उपलब्धि से उनका परिवार और पूरा देश व प्रदेश गर्वित है. उन्हें देशभर से बधाइयां दी जा रही हैं. एक इंटरव्यू में लक्ष्य ने बातचीत करते हुए बताया कि वो सही से बोल नहीं सकते हैं. वे आज इस मुकाम पर पहुंचकर गर्वित और खुश महसूस कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे साल 2028 में होने वाले पैरा ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाना चाहते हैं. वे इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं.

कौन हैं लक्ष्य गुप्ता?

बता दें कि लक्ष्य गुप्ता हरियाणा के फरीदाबाद के रहने वाले हैं. वे खेल के साथ-साथ पढ़ाई में भी होशियार हैं. वो बीए फर्स्ट ईयर के छात्र हैं. वे 2028 में होने वाले ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाना चाहते हैं. लक्ष्य को फरीदाबाद के मानव रचना संस्थान और स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने प्रशिक्षित किया है. उन्हें M3M फाउंडेशन, आईएएस विक्र्रम सिंह और अग्रवाल वैश्य परिवार जैसी संस्थाओं से समर्थन मिला. 

दिव्यांग होने के कारण पिता ने छोड़ा साथ

वहीं लक्ष्य की मां ने एक इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि जब लक्ष्य का जन्म हुआ, तो हमें एक साल बाद पता चला कि वो दिव्यांग है. इसके कारण लक्ष्य के पिता ने मां और बेटे को छोोड़ दिया. इसके बाद मैं लक्ष्य को लेकर मायके चली आई. कुछ दिनों बाद फरीदाबाद आकर यहीं रहने लगी. यहां मैंने नौकरी के साथ ही लक्ष्य की परवरिश की. स्कूल में उसका एडडमिशन कराया. इसके बाद जब वो 10 साल का हुआ, तो किसी ने उसे टेबल टेनिस गिफ्ट किया. इसके बाद उसने टेबल टेनिस खेलना शुरू किया. उसने पूरा फोकस गेम पर लगाया और कई मेडल जीते. मेरी सैलरी कम थी और ट्रेनिंग दिलाना मेरे बजट से बाहर था, तब कई संस्थाओं ने मेरा सपोर्ट किया. उनके कारण ही लक्ष्य कई मेडल लेकर आया है. 

अब तक जीते कई मेडल्स

उन्होंने बताया कि साल 2021 और 2023 में हुए पैरा नेशनल चैंपियनशिप में टेबल टेनिस में गोल्ड मेडल जीता. 2023 में दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स गेम्स में उसने कांस्य पदक जीता. खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2023 में बुखार होने के बावजूद भी उसने कांस्य पदक जीता. इसके अलावा उसने 15  साल की उम्र में अंडर-23 में एशिया में पहला स्थान हासिल कर रिकॉर्ड बनाया. 

तीन साल बाद भी नहीं मिली प्राइज मनी

लक्ष्य की मां ने सरकार से अपील की कि नीति के अनुसार जो प्राइज मनी और सुविधाएं मिलनी चाहिए, वो जल्द सुनिश्चित की जाएं. इसकी मदद से लक्ष्य और बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे. उन्होंने बताया कि तीन साल बाद भी अब तक HTET या अन्य प्राइज मनी नहीं मिली है.

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