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आज के दिन हुआ था प्रेमानंद महाराज का जन्म, जानिए कितनी उम्र के हो चुके हैं और क्या है असली नाम

Premanand Maharaj Janmotsav 2026: हर साल की तरह इस साल भी वृंदावन नें प्रेमानंद जी महाराज का जन्मोत्सव नवरात्रि के पहले दिन मनाया जा रहा है, इस मौके केली कुंज में देश भर से भक्त  और संत  उनके दर्शन के लिए पहुंचे हैं.

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Premanand Maharaj Janmotsav 2026: वृंदावन इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के रंग में डूबा हुआ है. हर साल की तरह इस बार भी 18 और 19 मार्च को प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. खास बात यह है कि उनका जन्मदिन चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पड़ता है, इसलिए इस अवसर पर भक्तों की भीड़ और भी अधिक देखने को मिल रही है.

उत्सव की शुरुआत 18 मार्च से ही हो चुकी है, जिसमें भजन-कीर्तन, संतों का आगमन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया है. देश-विदेश से आए श्रद्धालु महाराज के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंच रहे हैं.

 संतों का विशेष समागम

इस अवसर पर वृंदावन में संतों का अद्भुत संगम देखने को मिला. विभिन्न आश्रमों के संत और महंत पारंपरिक वेशभूषा में महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे. उनका स्वागत पूरे सम्मान के साथ किया गया और और तिलक लगाकर संतों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

 फूलों से सजा पूरा आयोजन

जन्मोत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे परिसर को फूलों से सजाया गया. जमीन पर गुलाब और गेंदे के फूलों से खूबसूरत रंगोली बनाई गई, जो देखने में बेहद आकर्षक थी. इसके साथ ही कलाकारों ने राधा-कृष्ण के रूप में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे माहौल और भी भावपूर्ण हो गया.

प्रेमानंद महाराज की उम्र और असली नाम

प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन का नाम ‘अनिरुद्ध कुमार पांडे’ बताया जाता है. हालांकि वे अपनी निजी जिंदगी को लेकर ज्यादा चर्चा में रहना पसंद नहीं करते, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी उम्र करीब 57 वर्ष मानी जाती है.अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 30 मार्च 1969 को हुआ, जबकि वे अपना जन्मोत्सव हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मनाते हैं.

भक्तों को दिया खास संदेश

जन्मोत्सव के दौरान महाराज ने अपने अनुयायियों को सादगी और भक्ति का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि जीवन में दिखावे से दूर रहकर भगवान के नाम का स्मरण करना ही सच्चा सुख देता है.

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Premanand Maharaj Janmotsav 2026: हर साल की तरह इस साल भी वृंदावन नें प्रेमानंद जी महाराज का जन्मोत्सव नवरात्रि के पहले दिन मनाया जा रहा है, इस मौके केली कुंज में देश भर से भक्त  और संत  उनके दर्शन के लिए पहुंचे हैं.

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Premanand Maharaj Janmotsav 2026: वृंदावन इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के रंग में डूबा हुआ है. हर साल की तरह इस बार भी 18 और 19 मार्च को प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज का जन्मोत्सव बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. खास बात यह है कि उनका जन्मदिन चैत्र नवरात्रि के पहले दिन पड़ता है, इसलिए इस अवसर पर भक्तों की भीड़ और भी अधिक देखने को मिल रही है.

उत्सव की शुरुआत 18 मार्च से ही हो चुकी है, जिसमें भजन-कीर्तन, संतों का आगमन और आध्यात्मिक कार्यक्रमों ने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया है. देश-विदेश से आए श्रद्धालु महाराज के दर्शन के लिए वृंदावन पहुंच रहे हैं.

 संतों का विशेष समागम

इस अवसर पर वृंदावन में संतों का अद्भुत संगम देखने को मिला. विभिन्न आश्रमों के संत और महंत पारंपरिक वेशभूषा में महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे. उनका स्वागत पूरे सम्मान के साथ किया गया और और तिलक लगाकर संतों ने अपनी श्रद्धा व्यक्त की.

 फूलों से सजा पूरा आयोजन

जन्मोत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पूरे परिसर को फूलों से सजाया गया. जमीन पर गुलाब और गेंदे के फूलों से खूबसूरत रंगोली बनाई गई, जो देखने में बेहद आकर्षक थी. इसके साथ ही कलाकारों ने राधा-कृष्ण के रूप में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे माहौल और भी भावपूर्ण हो गया.

प्रेमानंद महाराज की उम्र और असली नाम

प्रेमानंद महाराज का जन्म उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका बचपन का नाम ‘अनिरुद्ध कुमार पांडे’ बताया जाता है. हालांकि वे अपनी निजी जिंदगी को लेकर ज्यादा चर्चा में रहना पसंद नहीं करते, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी उम्र करीब 57 वर्ष मानी जाती है.अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार उनका जन्म 30 मार्च 1969 को हुआ, जबकि वे अपना जन्मोत्सव हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मनाते हैं.

भक्तों को दिया खास संदेश

जन्मोत्सव के दौरान महाराज ने अपने अनुयायियों को सादगी और भक्ति का महत्व समझाया. उन्होंने कहा कि जीवन में दिखावे से दूर रहकर भगवान के नाम का स्मरण करना ही सच्चा सुख देता है.

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