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Sabarimala Gold Theft Case: केरल के कोल्लम में एक विजिलेंस कोर्ट ने बुधवार को सबरीमाला अयप्पा मंदिर की द्वारपालक (संरक्षक देवता) मूर्तियों से सोने की कथित हेराफेरी के दूसरे मामले में मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को कानूनी जमानत देने पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. बेंगलुरु के बिजनेसमैन मिस्टर पोट्टी को 21 जनवरी को मंदिर के श्रीकोविल (गर्भगृह) के दरवाजों के फ्रेम से सोने की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में कानूनी जमानत मिल गई थी.
क्या है पूरा मामला?
सबरीमाला सोने का विवाद सबरीमाला मंदिर में सोने की परत चढ़ाने के काम में अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा है. यह स्थिति 1998 में उद्योगपति विजय माल्या द्वारा 30.3 किलोग्राम सोना और 1,900 किलोग्राम तांबा दान करने से पैदा हुई थी, जिसका मकसद केरल के सबरीमाला अयप्पा मंदिर के गर्भगृह और लकड़ी की नक्काशी पर परत चढ़ाना था.
सबरीमाला सोने की चोरी के मामले से जुड़े बल्लारी के ज्वेलर गोवर्धन ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को बताया कि उन्नीकृष्णन पोट्टी ने सोना ₹15 लाख में बेचा था. गोवर्धन ने यह भी बताया कि उसने सबरीमाला के नाम पर पोट्टी को ₹70 लाख से ज़्यादा ट्रांसफर किए थे, जैसा कि SIT को दिए गए उसके बयान में रिकॉर्ड किया गया है.
कोर्ट ने क्यों दी पोट्टी को राहत?
कोर्ट ने उन्नीकृष्णन पोट्टी को यह राहत इसलिए दी क्योंकि सबरीमाला सोने के नुकसान से जुड़े मामलों की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने आरोपी की गिरफ्तारी के बाद तय 90 दिनों के अंदर दोनों मामलों में चार्जशीट दाखिल नहीं की है. SIT का प्रतिनिधित्व कर रहे पब्लिक प्रॉसिक्यूटर सिजू राजन ने पोट्टी को जमानत दिए जाने का विरोध किया था.
दोनों मामलों में जमानत मिलने से पोट्टी के जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है. इसी तरह की राहत पहले ही त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों बी मुरारी बाबू और एस श्रीकुमार को मिल चुकी है, क्योंकि तय समय के अंदर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी. श्रीकुमार को श्रीकोविल के दरवाजों के फ्रेम से सोने के नुकसान से जुड़े दूसरे मामले में आरोपी नहीं बनाया गया है. इनके अलावा, TDB के कार्यकारी अधिकारी डी सुधीश कुमार को भी सोमवार को इसी आधार पर यही राहत मिली. SIT ने अब तक दो पूर्व TDB अध्यक्षों सहित 12 लोगों को गिरफ्तार किया है.