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संसद की सीढ़ियों पर गिरे शशि थरूर, पैर में आया हेयर फ्रैक्चर ,व्हीलचेयर पर पहुंचे संसद जानें कितने दिन में होंगे ठीक?

Shashi Tharoor News: बुधवार को संसद भवन कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद की सीढ़ियों से उतरते समय अचानक फिसल गए और उन्हें पैर में गंभीर चोट लग गई. अब डाक्टर ने उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर बताया है,आइए जानते हैं आखिर शशि थरूर कितने दिनों में ठीक होंगे.

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Shashi Tharoor Latest Update: बुधवार को संसद भवन में जैसे ही शशि थरूर गिरे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद इमरान मसूद तुरंत उनकी ओर बढ़े. दोनों नेताओं ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उन्हें सहारा दिया और खड़ा किया. बाद में शशि थरूर ने इस पल को याद करते हुए कहा कि यह सहयोग ‘दिल छू लेने वाला’ था और राजनीति के बीच इंसानियत की खूबसूरत मिसाल है.

दर्द और चोट के बावजूद शशि थरूर ने अपने दिन की जिम्मेदारियों को नहीं छोड़ा. उन्होंने विदेशी राजनयिकों के साथ तय बैठकों में हिस्सा लिया और घायल पैर को स्टूल पर रखकर चर्चा करते नजर आए. उनके करीबी लोगों के मुताबिक, दर्द जरूर था लेकिन उनका हौसला पूरी तरह कायम रहा.

सोशल मीडिया पर कविता के जरिए दिया मैसेज

चोट के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और गहरी पंक्ति शेयर की-
‘जिस दीये को तूफान में जलना होगा, उसे संभल-संभल कर चलना होगा.’

जांच में फ्रैक्चर की पुष्टि

 जांच में डॉक्टरों ने पुष्टि की कि शशि थरूर के पैर में फ्रैक्चर है. उनके कार्यालय की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में वे व्हीलचेयर पर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन संसदीय कामकाज और अन्य तय कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहेंगे.इसी बीच थरूर परिवार को एक और कठिन खबर मिली. शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर, जो वॉशिंगटन पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लिखते थे, को नौकरी से हटा दिया गया. अखबार में बड़े स्तर पर पुनर्गठन के चलते करीब 300 कर्मचारियों की छंटनी की गई, जिसमें ईशान भी शामिल थे.

क्या होता है हेयरलाइन फ्रैक्चर?

हेयरलाइन फ्रैक्चर को आम भाषा में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ भी कहा जाता है. इसमें हड्डी पूरी तरह टूटती नहीं है, बल्कि उसमें एक बहुत बारीक सी दरार पड़ जाती है. यह समस्या अक्सर तब होती है जब किसी हड्डी पर बार-बार दबाव पड़ता है या उसे ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है.सामान्य फ्रैक्चर की तरह यह चोट अचानक किसी तेज़ झटके से नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है. इसी वजह से कई बार लोग शुरुआत में इसके लक्षणों को हल्के दर्द या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे पहचान में देर हो जाती है.

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Shashi Tharoor News: बुधवार को संसद भवन कांग्रेस सांसद शशि थरूर संसद की सीढ़ियों से उतरते समय अचानक फिसल गए और उन्हें पैर में गंभीर चोट लग गई. अब डाक्टर ने उन्हें हेयरलाइन फ्रैक्चर बताया है,आइए जानते हैं आखिर शशि थरूर कितने दिनों में ठीक होंगे.

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Shashi Tharoor Latest Update: बुधवार को संसद भवन में जैसे ही शशि थरूर गिरे, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और सांसद इमरान मसूद तुरंत उनकी ओर बढ़े. दोनों नेताओं ने बिना किसी राजनीतिक भेदभाव के उन्हें सहारा दिया और खड़ा किया. बाद में शशि थरूर ने इस पल को याद करते हुए कहा कि यह सहयोग ‘दिल छू लेने वाला’ था और राजनीति के बीच इंसानियत की खूबसूरत मिसाल है.

दर्द और चोट के बावजूद शशि थरूर ने अपने दिन की जिम्मेदारियों को नहीं छोड़ा. उन्होंने विदेशी राजनयिकों के साथ तय बैठकों में हिस्सा लिया और घायल पैर को स्टूल पर रखकर चर्चा करते नजर आए. उनके करीबी लोगों के मुताबिक, दर्द जरूर था लेकिन उनका हौसला पूरी तरह कायम रहा.

सोशल मीडिया पर कविता के जरिए दिया मैसेज

चोट के बाद शशि थरूर ने सोशल मीडिया पर एक भावुक और गहरी पंक्ति शेयर की-
‘जिस दीये को तूफान में जलना होगा, उसे संभल-संभल कर चलना होगा.’

जांच में फ्रैक्चर की पुष्टि

 जांच में डॉक्टरों ने पुष्टि की कि शशि थरूर के पैर में फ्रैक्चर है. उनके कार्यालय की ओर से बताया गया कि आने वाले दिनों में वे व्हीलचेयर पर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन संसदीय कामकाज और अन्य तय कार्यक्रमों में हिस्सा लेते रहेंगे.इसी बीच थरूर परिवार को एक और कठिन खबर मिली. शशि थरूर के बेटे ईशान थरूर, जो वॉशिंगटन पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय मामलों पर लिखते थे, को नौकरी से हटा दिया गया. अखबार में बड़े स्तर पर पुनर्गठन के चलते करीब 300 कर्मचारियों की छंटनी की गई, जिसमें ईशान भी शामिल थे.

क्या होता है हेयरलाइन फ्रैक्चर?

हेयरलाइन फ्रैक्चर को आम भाषा में ‘स्ट्रेस फ्रैक्चर’ भी कहा जाता है. इसमें हड्डी पूरी तरह टूटती नहीं है, बल्कि उसमें एक बहुत बारीक सी दरार पड़ जाती है. यह समस्या अक्सर तब होती है जब किसी हड्डी पर बार-बार दबाव पड़ता है या उसे ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाता है.सामान्य फ्रैक्चर की तरह यह चोट अचानक किसी तेज़ झटके से नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे विकसित होती है. इसी वजह से कई बार लोग शुरुआत में इसके लक्षणों को हल्के दर्द या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे पहचान में देर हो जाती है.

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