Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को आय से अधिक संपत्ति के मामले में जमानत दे दी है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मजीठिया ने अपनी जान को खतरा बताते हुए अंतरिम जमानत मांगी थी और कहा था कि वह पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं. उनके वकील ने दलील दी कि एक पुराने NDPS मामले की सामग्री, जिसमें मजीठिया को 2022 में जमानत मिली थी, जिसका स्तेमाल एक नया मामला बनाने के लिए किया गया, जिसे उन्होंने राजनीतिक बदले की भावना बताया.
जिसको लेकर बेंच ने कहा कि CrPC की धारा 173(2) के तहत पुलिस रिपोर्ट पहले ही दायर की जा चुकी है और निकट भविष्य में ट्रायल खत्म होने की कोई संभावना नहीं है.
कोर्ट ने क्या-क्या कहा?
कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि कथित आय से अधिक संपत्ति 2007-2017 की अवधि से संबंधित है, जबकि FIR 2025 में दर्ज की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को ट्रायल कोर्ट से कड़ी जमानत शर्तें मांगने की अनुमति दी, जिसमें विदेश यात्रा पर प्रतिबंध भी शामिल है. पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मेहता ने टिप्पणी की थी कि हम उन्हें चंडीगढ़ जेल में शिफ्ट करने के लिए कह रहे हैं, इसमें क्या दिक्कत है?”
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वकील ने क्या दलील दी?
मजीठिया की ओर से पेश हुए सीनियर वकील गौरव अग्रवाल ने कोर्ट से अंतरिम जमानत देने का आग्रह किया था, यह तर्क देते हुए कि उनकी जान को असली खतरा है, जैसा कि राज्य की 3 जनवरी की अपनी इंटेलिजेंस रिपोर्ट में बताया गया है. वकील ने कोर्ट को बताया कि मजीठिया जून 2025 से नाभा जेल में बंद हैं. सुप्रीम कोर्ट ने मामले को स्थगित करते हुए राज्य सरकार को काउंटर-एफिडेविट दाखिल करने का समय दिया था और कहा कि मजीठिया की अंतरिम जमानत याचिका पर अगली सुनवाई में विचार किया जाएगा.
किस मामले में मजीठिया को मिली जमानत?
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराओं के तहत FIR दर्ज की थी. मजीठिया ने इस FIR में राहत पाने के लिए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद मजीठिया ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. जिसके बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में जमानत दे दी है.