Smart glasses and privacy: दुनिया में टेक्नोलॉजी क्या कुछ नहीं कर सकती है और क्या कुछ नहीं करवा सकती है. अगर महिलाएं स्मार्ट ग्लासेस पहनती हैं तो ज़रा सावधान होने की ज़रूरत है. क्योंकि यह खबर उन महिलाओं के लिए जिन्हें स्मार्ट ग्लासेस पहनना का बेहद ही शौक है. अब इन स्मार्ट ग्लासेस ने महिलाओं की सुरक्षा के साथ-साथ निजता (Privacy) पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बात से बेहद ही अंजान, स्टाइलिश दिखने वाले ये चश्मे अब बिना अनुमति वीडियो रिकॉर्डिंग और सोशल मीडिया हरासमेंट का तेजी से एक नया जरिया बनते जा रहे हैं.
स्मार्ट ग्लासेस क्यों होते हैं खतरनाक?
दरअसल, आज के दौर में लोग स्मार्ट ग्लासेस को अब खतरनाक बता रहे हैं. दरअसल, इनका कैमरा आंखों के सामने चश्मे की फ्रेम में छिपा होता है. तो वहीं, दूसरी तरफ मोबाइल फोन की तरह इसे हाथ में पकड़ने की जरूरत नहीं होती, जिससे सामने वाले को पता ही नहीं चलता कि वह हमें रिकॉर्ड कर पा रहे हैं या फिर नहीं.
सोशल मीडिया पर झेलना पड़ता है अपमान
इतना ही नहीं, खुद को ‘पिक-अप आर्टिस्ट’ कहने वाले लोग सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं से बातचीत शुरू करते हैं और चश्मे के जरिए चोरी-छिपे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल देते हैं. जिससे न सिर्फ उनकी छवि पर असर पड़ता है बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
कानून की सुस्ती और लगातार बढ़ते अपराध के मामले
अमेरिका से लेकर ब्रिटेन और भारत तक, कानून इस नई तकनीक के मुकाबले काफी पीछे चल रहे हैं. जहां, अमेरिका की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हरक्यूलिसे (Herculyse) के साथ सुपरमार्केट में हुई घटना हो या ब्रिटेन में निजी पलों की चोरी-छिपे रिकॉर्डिंग, पकड़े जाने पर दोषियों को ज्यादा गंभीर सजा नहीं दी जाती है.
बात करें भारत के बारे में तो,भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट में भी सार्वजनिक जगहों पर रिकॉर्डिंग को लेकर बेहद ही कड़े नियम बनाए गए हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ टेक कंपनियां इसे सिर्फ और सिर्फ एक कानूनी अपराध की श्रेणी में गिनती है. जिससे दोषी को कड़ी सजा नहीं दी जाती है.
आखिर महिलाएं कैसे करेंगी खुद से इसकी सुरक्षा?
अब सबसे आखिरी में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं. जब तक भारत और अमेरिका जैसे देशों में सख्त से सख्त कानून नहीं होते हैं, तब तक जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है. तो वहीं, महिलाओं को खास ध्यान देने की यह ज़रूरत है कि स्मार्ट ग्लासेस सामान्य चश्मों से थोड़े मोटे और अलग दिखते हैं, और सार्वजनिक स्थलों पर रिकॉर्डिंग के लिए साफ नियमों की मांग अब पूरी तरह से अनिवार्य हो गई है.