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सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर पीएम मोदी का संदेश: संघर्ष और इतिहास की यात्रा, जानें सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना और पौराणिक कथा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को शुरू हुए 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के मौके पर भारत की सांस्कृतिक सहनशक्ति और उसके संघर्षों की गाथा को याद किया.  इस साल गुजरात के गिर सोमनाथ में 8 से 10 जनवरी तक होने वाला 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' चलेगा,आइए जानते हैं इसके बारे में.

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Somnath Pride Festival: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा, “आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व शुरू हो रहा है. हजार साल पहले, जनवरी 1026 में, सोमनाथ मंदिर पर इसके इतिहास का पहला हमला हुआ था. 1026 का हमला और उसके बाद हुए कई हमले हमारी शाश्वत आस्था को हिला नहीं सके; बल्कि, उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना को और मजबूत किया, और सोमनाथ को बार-बार पुनर्स्थापित किया गया.”

इस मौके पर, प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें शेयर कीं. उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का यह अवसर भारत माता के उन अनगिनत बेटों और बेटियों को याद करने का त्योहार है जिन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया. समय कितना भी कठिन और भयानक क्यों न रहा हो, उनका संकल्प अडिग रहा. हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी भक्ति अटूट रही. अटूट आस्था के हज़ार साल का यह अवसर हमें राष्ट्रीय एकता के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा देता है.”

सोमनाथ मंदिर की कहानी

भगवान शिव को कई नामों से जाना जाता है. इनमें से एक नाम सोमनाथ भी है. ज्योतिषियों का मानना ​​है कि सोम एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है चंद्र देवता. सीधे शब्दों में कहें तो सोम का शाब्दिक अर्थ चंद्रमा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरात के सौराष्ट्र में स्थित शिव मंदिर को सोमनाथ मंदिर क्यों कहा जाता है? आइए इसके पीछे की पौराणिक कहानी जानते हैं:

शास्त्रों के अनुसार

सनातन शास्त्रों में वर्णन है कि एक बार भगवान शिव और माता पार्वती ने सभी देवी-देवताओं को भोजन के लिए आमंत्रित किया. चंद्र देव भी कैलाश पर भोजन के लिए आए. देवी पार्वती और भगवान शिव ने सभी देवी-देवताओं का भव्य स्वागत किया. इस समय, सभी देवी-देवताओं को उनकी इच्छानुसार भोजन मिला. इसके बाद, सभी अपने-अपने निवास स्थान पर लौट गए. इस दौरान, भगवान गणेश अपने वाहन, चूहे पर सवार होकर कैलाश पर्वत पर क्रीड़ा कर रहे थे. भगवान गणेश का रूप देखकर चंद्र देव हँसे. इस दौरान, चूहे का भी संतुलन बिगड़ गया. यह देखकर चंद्र देव ने कहा, ” प्रभु! आपकी शारीरिक बनावट अजीब है. आपके वजन ने तो चूहे का संतुलन भी बिगाड़ दिया है. स्थिति ऐसी है कि चूहा चल भी नहीं पा रहा है. आपको देखकर किसी के भी चेहरे पर मुस्कान आ सकती है.”

यह सुनकर भगवान गणेश क्रोधित हो गए. तुरंत उन्होंने कहा, “तुम्हें अपनी चमक पर बहुत घमंड हो गया है. मैं तुम्हें श्राप देता हूं, तुम्हारी चमक खत्म हो जाएगी.” भगवान गणेश के श्राप के कारण चंद्र देव की चमक फीकी पड़ गई. अपने धाम लौटने के बजाय, चंद्र देव भगवान विष्णु के पास गए और उन्हें अपनी आपबीती सुनाई. तब भगवान विष्णु ने चंद्र देव को भगवान शिव की पूजा करने की सलाह दी. बाद में, जिस स्थान पर चंद्र देव ने भगवान शिव की तपस्या की थी, वह अब सोमनाथ के नाम से जाना जाता है. चंद्र देव की घोर भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें श्राप से मुक्त कर दिया. यह भी कहा जाता है कि चंद्र देव ने सोमनाथ में एक शिवलिंग स्थापित किया और भगवान शिव की तपस्या की. 

इस साल सोमनाथ पर्व मे क्या है खास ?

  • इस साल का यह आयोजन खास है क्योंकि यह सोमनाथ मंदिर पर महमूद गजनवी के हमले के ठीक 1,000 साल पूरे होने पर हो रहा है. 
  • इस ऐतिहासिक घटना की 1,000वीं सालगिरह पर, सोमनाथ शहर एक बार फिर देश और दुनिया को आस्था, गौरव और सनातन धर्म का संदेश देगा.
  • इस तीन दिवसीय उत्सव के दौरान, सोमनाथ मंदिर में लगातार 24 घंटे ‘ओंकार नाथ’ का जाप किया जाएगा.
  • मंदिर के समुद्र तट पर नावें खड़ी की जाएंगी और उन्हें खास रोशनी से सजाया जाएगा ताकि भक्तों को एक शानदार नज़ारा देखने को मिले.
  • भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए और ज्यादा से ज्यादा लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए, चार अलग-अलग शहरों से हर दिन एक ट्रेन सोमनाथ आएगी. 
  •  ट्रेनें सूरत, राजकोट, वडोदरा और अहमदाबाद से चलेंगी. देश भर के संत, धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में भक्त इन ट्रेनों से सोमनाथ जाएंगे.
  • एक शानदार ड्रोन शो भी आयोजित किया जाएगा, जो आधुनिक तकनीक के जरिए सोमनाथ के इतिहास, संघर्षों और अटूट आस्था को दिखाएगा.

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