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Surya Devta: सूर्य देव को जल चढ़ाते समय इन नियमों का रखें खास ध्यान

Surya Devta ko Jal: सूर्य देव को देवों का देव कहा गया है. हिंदू धर्म में इन्हें ईश्वर की उपाधि दी गई है. इन्हें बुद्धि का देवता भी कहा जात है जो व्यक्ति इनकी पूजा करता है, वो करियर, बिजनेस और जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता है. सूर्य देवता लोगों के जीवन में सुख-शांति, तरक्की के अवसर प्रदान करते हैं. कई लोग इनकी कृपा पाने के लिए इन्हें जल अर्पित करते हैं. तो आइए जानते हैं कि सूर्य देव को जल चढ़ाते समय किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए.

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Surya Devta: कई लोग सूर्य देवता को जल तो देते हैं पर जब उन्हें मनचाहा फल नहीं मिलता तो अफसोस करते रहते हैं. तो अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं, सूर्यदेवता को जल चढ़ाते समय आपको भी कुछ नियम जान लेने चाहिए जिससे आपको करियर में ग्रोथ और बिजनेस में आर्थिक लाभ मिल सकता है. 

उगते हुए सूर्य को ही दें अर्घ्य

आप कोशिश करें कि हमेशा उगते हुए सूरज को ही जल दें. ऐसा करने से आपकी सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और आपको जीवन में सफलता प्राप्त होती है. ये आपके जीवन में तरक्की के अवसरों को खोल देता है. इसलिए नियमित रूप से सुबह के समय ही सूर्य देव को जल दें. कुछ लोग दस, ग्यारह बजे या दोपहर तक सूर्य देवता को जल देते हैं जिसकी वजह से उन्हें लाभ नहीं मिलता है. ऐसा करने से आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी और आपके जीवन में किसी भी तरह की परेशानी नहीं आएगी.

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लोटे का रखें विशेष रूप से ध्यान 

जब आप सूर्य देवता को जल अर्पित करते हैं तो ध्यान रखें कि लोटा किस धातु से बना हुआ है. आजकल के समय में लोग तांबे से लेकर पीतल, चांदी या मिट्टी के लोटे में जल चढ़ाते हैं. लेकिन आप ध्यान रखें कि स्टील के लोटें में सूर्य देवता को जल नहीं चढ़ाना चाहिए. इसके अलावा आप किसी भी लोटे का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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