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अब स्मार्टफोन स्कैन कर लेगा ब्रेस्ट कैंसर? MIT के वैज्ञानिकों ने किया कमाल, बचेंगी लाखों जिंदगियां

एमआईटी वियरेबल अल्ट्रासोनिक सेंसर: वैज्ञानिकों ने स्मार्टफोन के आकार जितना छोटा एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस तैयार किया है, जो शुरुआती स्टेज में ही ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने में मदद करेगा.

एमआईटी वियरेबल अल्ट्रासोनिक सेंसर: MIT के साइंटिस्ट्स ने एक पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस बनाया है जो ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में मददगार साबित हो सकता है. यह डिवाइस इतना छोटा है कि इसे घर पर या डॉक्टर के क्लिनिक में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. 500 ग्राम से भी कम वज़न वाला यह डिवाइस न सिर्फ़ सस्ता है बल्कि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए भी एक वरदान है, जहां आस-पास अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है. आइए इस अनोखे आविष्कार के बारे में और जानें.

स्मार्टफोन जितना छोटा सिस्टम

MIT के एसोसिएट प्रोफेसर कानन डागदेविरन और उनकी टीम का बनाया यह डिवाइस बड़ी और महंगी अल्ट्रासाउंड मशीनों को चुनौती देता है. यह डिवाइस स्मार्टफोन जितना छोटा है और इसमें एक प्रोसेसिंग मॉड्यूल है जो फोन से थोड़ा बड़ा है. इसे बनाने में सिर्फ 300 डॉलर या 25,000 रुपये का खर्च आया. यह डिवाइस आसानी से लैपटॉप से ​​कनेक्ट हो सकता है और 3D इमेज दिखा सकता है. इसमें बिजली की खपत भी बहुत कम होती है. इसे नॉर्मल 5V DC एडॉप्टर या बैटरी से भी चलाया जा सकता है.

मैमोग्राम के बीच पनपने वाले ट्यूमर पर लगेगी लगाम

अक्सर देखा गया है कि नियमित मैमोग्राम के बीच के समय में कुछ ट्यूमर तेजी से विकसित हो जाते हैं, जिन्हें इंटरवल कैंसर (Interval Cancers) कहा जाता है. ये कैंसर ज्यादा खतरनाक और जानलेवा साबित होते हैं क्योंकि इनका पता देर से चलता है. MIT का यह नया डिवाइस ऐसे ट्यूमर को समय रहते पकड़ने में सक्षम है.

शुरुआती जांच से 100% तक सर्वाइवल की उम्मीद

विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ब्रेस्ट कैंसर का पता शुरुआती स्टेज में चल जाए तो मरीज के बचने की संभावना लगभग 100 प्रतिशत तक हो सकती है. यह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड डिवाइस इसी दिशा में एक बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है.

क्यों खास है यह डिवाइस?

इस नई तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह न सिर्फ प्रभावी है, बल्कि आम लोगों की पहुंच में भी है.

  • सस्ता और सुलभ: इस डिवाइस की कीमत करीब 300 डॉलर है, जबकि पारंपरिक अल्ट्रासाउंड और मैमोग्राम मशीनें लाखों रुपये की होती हैं.
  • दर्द-रहित जांच: इसमें किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाता और यह 15 सेंटीमीटर गहराई तक 3D इमेजिंग करने में सक्षम है.
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान: जहां डॉक्टर और रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी है, वहां यह डिवाइस महिलाओं के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है.

भविष्य में घर पर टेस्टिंग मुमकिन

साइंटिस्ट्स का कहना है कि भविष्य में यह डिवाइस सीधे स्मार्टफोन से कनेक्ट हो जाएगी. इसका मतलब है कि महिलाएं अपने घर बैठे आराम से स्कैन कर पाएंगी और समय पर इलाज पा सकेंगी.

MIT का यह इनोवेशन दिखाता है कि जब साइंस और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल इंसानियत के फायदे के लिए किया जाता है, तो नतीजे सच में जादुई होते हैं. AI और स्मार्ट मेडिकल डिवाइस भविष्य में हेल्थकेयर सिस्टम को बदल सकते हैं और लाखों जानें बचा सकते हैं.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

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