Viral Video News: रेगिस्तान की तपती रेत और ऊंचे टीले ज्यादातर शक्तिशाली एसयूवी (SUV) की असली परीक्षा लेते हैं. तो वहीं, सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसकी चारों तरफ जोरों-शोरों से चर्चा की जा रही है. आखिर क्या है मामला जानने के लिए पढ़िए पूरी खबर.
वायरल वीडियो की हो रही चर्चा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने ऑफ-रोडिंग के दीवानों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है. क्या केवल इंजन की कच्ची ताकत (Raw Power) रेत पर विजय पाने के लिए काफी है? इस वीडियो में महिंद्रा स्कॉर्पियो-N और टोयोटा फॉर्च्यूनर को बिना किसी खास तैयारी के सीधे रेत के टीलों पर उतरते हुए देखा जा सकता है.
यहां देखें वायरल वीडियो
ताकत बनाम तकनीक: मैदान-ए-जंग
तो वहीं, वीडियो की शुरुआत में साफ रूप से देखा जा सकता है कि दोनों गाड़ियां पूरी रफ्तार के साथ टीले पर चढ़ने की कोशिश कर रही हैं. महिंद्रा स्कॉर्पियो-N अपने आधुनिक ‘mStallion’ पेट्रोल और ‘mHawk’ डीजल इंजन के साथ जबरदस्त टॉर्क पैदा करती है, लेकिन रेत के ढीले कणों पर यह ताकत कभी-कभी पूरी तरह से भारी पड़ जाती है.
वीडियो में और क्या कुछ देखा गया है
लेकिन दूसरी तरफ टोयोटा फॉर्च्यूनर, जो अपनी विरासत और ‘लो-रेंज’ गियरिंग के लिए देशभर में सबसे ज्यादा मशहूर है, तो वहीं उसका वजन वितरण उसे थोड़ा संतुलित रखने में सबसे ज्यादा मदद भी करता है. हालांकि, इस वीडियो में साफ तौर से देखा जा सकता है कि दोनों ही गाड़ियां एक बिंदु पर आकर रुक गई हैं.
आखिरी में किसकी हुई बेहतरीन जीत?
हालांकि, इस परीक्षा का परिणाम किसी एक की जीत से ज्यादा ऑफ-रोडिंग के सिद्धांतों की सीख देता है. जहां, स्कॉर्पियो-N अपनी फुर्ती और उच्च टॉर्क की वजह से शुरुआती बढ़त लेती है, लेकिन रेत की गहराई में इसके पहिये स्पिन (Wheel Spin) करने लगते हैं. तो वहीं, दूसरी तरफ फॉर्च्यूनर अपने अनुभव और बेहतर अप्रोच एंगल की वजह से टीले के करीब पहुंच तो जाती है, पर बिना ‘टायर डिफ्लेशन’ (हवा कम करना) के यह भी फंस जाती है.
रेत पर सिर्फ ‘हॉर्सपावर’ नहीं, बल्कि मोमेंटम (संवेग) और टायर प्रेशर का पूरी तरह से खेल चलता है. तो वहीं, इस वायरल टेस्ट में कोई भी पूरी तरह सफल नहीं हुआ क्योंकि दोनों ने बुनियादी ऑफ-रोडिंग प्रोटोकॉल को नजरअंदाज किया था.