Asha Bhosle Death Reason: हिन्दी फिल्मों की मशहूर पार्श्वगायिका आशा भोसले का 92 साल की उम्र में निधन हो गया है. बता दें कि, आशा भोसले की मुस्किलें शनिवार से ही शुरू हो गई थीं. यानी शनिवार को उन्हें कार्डियक अरेस्टक आया था. इसके बाद सिंगर को उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. वहीं, रविवार को उनके परिजनों ने अस्पताल में भर्ती होने की वजह अत्यधिक थकान और सीने में इंफेक्शन बताया था. अब सवाल है कि, क्या सीने में इंफेक्शन की वजह से कार्डियक का पड़ सकता है? कार्डियक अरेस्ट क्या होता है? हार्ट अटैक से इतना अलग? इस बारे में India News को बता रहे हैं अल्केमिस्ट अस्पताल पंचकुला, हरियाणा के सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. सुनीत कुमार वर्मा-
क्या चेस्ट इंफेक्शन से कार्डियक अरेस्ट आ सकता है?
डॉ. सुनीत कुमार वर्मा कहते हैं कि, अगर किसी व्यक्ति को सीने में इंफेक्शन हो जाए, तो निश्चित तौर पर इसकी वजह से कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. सिर्फ कार्डियक अरेस्ट ही नहीं, जान भी जा सकती है. यह इंफेक्शन बुजुर्गों में अधिक घातक हो जाता है, जोकि कार्डियक इश्यूज की वजह बन सकता है.
चेस्ट इंफेक्शन से कार्डियक अरेस्ट का क्या कनेक्शन?
डॉक्टर कहते हैं कि, अगर किसी व्यक्ति को सीने में सीवियर इंफेक्शन हो जाए, तो इससे हार्ट पर दबाव बढ़ सकता है. इससे सडन कार्डियक अरेस्ट आ सकता है. अगर किसी शख्स की उम्र 90 साल से ज्यादा है, तो इस कंडीशन में कार्डियक इश्यूज हो जाते हैं और ऐसे में इंफेक्शन जानलेवा हो सकता है. इससे सेप्सिस हो सकता है, जिसकी वजह से कार्डियक अरेस्ट आ जाता है. हालांकि जांच के बाद इसका सटीक कारण पता चल सकता है.
कार्डियक अरेस्ट क्या होता है?
कार्डियक अरेस्ट में हार्ट स्टैंड स्टिल पोजीशन में चला जाता है. हार्ट एक पंप की तरह होता है और जिस तरह से इलेक्ट्रिकल शार्ट शर्किट की वजह से पंप कार्य करना बंद कर देता है ठीक उसी तरह से कार्डियक अरेस्ट में हार्ट काम करना बंद कर देता है. जो नार्मल हार्ट बीट 70 से 90 रहती है वो कार्डियक अरेस्ट की कंडीशन में 300 से 400 पहुंच जाती है. कार्डियक अरेस्ट होने पर सिर्फ कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर के जरिए ही मरीज की जान बचाई जा सकती है. अगर कार्डियक अरेस्ट होने पर 10 मिनट के अंदर सीपीआर नहीं शुरू किया गया तो मरीज को बचाना संभव नहीं है. कार्डियक अरेस्ट से बचने का एक मात्र तरीका सीपीआर ही है.
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही है?
एक्सपर्ट के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति के हार्ट में ठीक तरह से खून नहीं पहुंच पाता है. ऐसी स्थिति में दिल का दौरा यानी हार्ट अटैक आता है. हार्ट अटैक आने पर छाती को तेजी से दबाया जाता है, जिससे हार्ट में ब्लड सर्कुलेशन शुरू हो जाता है. हार्ट अटैक में दिल धड़कता रहता है, लेकिन मांसपेशियों को खून नहीं मिल पाता है. वहीं, कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति का हार्ट शरीर में खून पंप करना बंद कर देता है, जिससे सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. इस स्थिति में हार्ट के अंदर खून तो पहुंचता है, लेकिन हार्ट खून को पंप करना बंद कर देता है. इस स्थिति में शरीर के दूसरे अंगों तक खून और ऑक्सीजन पहुंचना बंद हो जाता है, जिससे शरीर के दूसरे हिस्से भी काम करना बंद कर देते हैं. दिल धड़कना बंद कर देता है तो इंसान सांस नहीं ले पाता है.
किन वजहों से आ सकता है कार्डियक अरेस्ट?
कार्डियक अरेस्ट का सबसे आम कारण दिल की धड़कन का असामान्य होना है, खासकर वेंट्रिकुलर फिब्रिलेशन. इसके अलावा कोरोनरी आर्टरी डिजीज, हार्ट अटैक, हार्ट मसल की कमजोरी, जन्मजात हृदय दोष और दिल के वाल्व की समस्याएं भी इसके जोखिम को बढ़ाती हैं. शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, गंभीर इंफेक्शन, ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ब्लड लॉस, या कोई बड़ा ट्रॉमा भी कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है. इसके अलावा ड्रग्स या कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट, अत्यधिक शराब का सेवन और अचानक तीव्र शारीरिक या मानसिक तनाव भी दिल की रिदम को बिगाड़ सकते हैं. खासकर जिन लोगों को पहले से हार्ट डिजीज, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या मोटापा है, उनमें कार्डियक अरेस्ट का खतरा अधिक होता है.