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Delhi Bus Safety Rules: दिल्ली में बसों की सुरक्षा सख्त, पर्दे-ब्लैक फिल्म पर रोक, पैनिक बटन भी जरूरी, जानें नए नियम

Delhi Bus Safety Rules: ग्रेटर नोएडा-दिल्ली के बीच चलती बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ कथित सामूहिक दरिंदगी की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने बस सुरक्षा नियमों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. बसों में पर्दे और काली फिल्म पर रोक, पर्याप्त आंतरिक रोशनी, कार्यशील लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य किए गए हैं. अनधिकृत जगह बस रोकने और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने से लेकर परमिट रद्द करने तक की कार्रवाई हो सकती है.

Delhi Bus Safety Rules: ग्रेटर नोएडा से दिल्ली के बीच चलती बस में 16 वर्षीय किशोरी के साथ सामूहिक दरिंदगी की घटना के बाद दिल्ली सरकार ने बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्ती बढ़ा दी है. परिवहन विभाग ने बस ऑपरेटरों को यात्री सुरक्षा से जुड़े अनिवार्य नियमों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है. राज्य परिवहन प्राधिकरण (STA) ने 31 अगस्त को जारी आदेश में दिल्ली में चलने वाली सभी बसों, यहां तक कि दूसरे राज्यों से आकर दिल्ली में संचालित होने वाली बसों के लिए भी सुरक्षा और संचालन से जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य किया है.

बसों में पर्दे और ब्लैक फिल्म पर रोक

परिवहन विभाग के दो पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि बसों की खिड़कियों पर ऐसी फिल्म नहीं लगी होनी चाहिए, जिससे अंदर का हिस्सा बाहर से दिखाई न दे. बसों में पर्दे लगाने पर भी रोक है. इसके साथ ही बस के अंदर पर्याप्त रोशनी चालू रखना जरूरी होगा. बस के चलने के दौरान अंदर पर्याप्त प्रकाश रहना चाहिए, ताकि बाहर से भी बस के अंदर की गतिविधियां दिखाई दे सकें. बसों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन भी कार्यशील स्थिति में रखने के निर्देश दिए गए हैं. इन सुरक्षा उपकरणों में किसी तरह की खराबी पाए जाने पर ऑपरेटरों पर कार्रवाई हो सकती है.

रात में बस खड़ी करने की जगह भी तय

नए निर्देशों में बसों की पार्किंग को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. रात के समय या बस के खाली खड़े रहने के दौरान उसे केवल अधिकृत, सुरक्षित और पर्याप्त रोशनी वाली जगह पर ही पार्क करना होगा.
बस से यात्रियों के चढ़ने और उतरने की अनुमति केवल निर्धारित बस स्टॉप या अधिकृत स्थानों पर होगी. सड़क के बीच, चौराहे या किसी असुरक्षित अथवा अनधिकृत जगह पर बस रोकना प्रतिबंधित रहेगा.

ड्राइवर और स्टाफ का भी होगा सत्यापन

परिवहन विभाग ने बस चालकों और अन्य कर्मचारियों के लिए भी नियम सख्त किए हैं. ड्राइवर और बस स्टाफ का व्यवहार यात्रियों के साथ उचित होना चाहिए. ड्राइवर के पास वैध लाइसेंस और जहां जरूरी हो, वैध बैज होना अनिवार्य है. बस ऑपरेटरों को कर्मचारियों को ड्यूटी पर लगाने से पहले उनका सत्यापन कराने का भी निर्देश दिया गया है. विभाग ने सभी ऑपरेटरों से कहा है कि वह इन नियमों की जानकारी अपने सभी ड्राइवरों और कर्मचारियों तक पहुंचाएं.

नियम तोड़े तो परमिट हो सकता है रद्द

सरकार ने साफ किया है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नियम तोड़ने पर जुर्माना लगाने के साथ वाहन को हिरासत में लेने या जब्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है. गंभीर या लगातार उल्लंघन की स्थिति में बस का परमिट निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है. परिवहन विभाग ने ऑपरेटरों को निर्देश दिया है कि नए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें.

दिल्ली में करीब 450 निजी बस ऑपरेटर

अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 450 पंजीकृत निजी बस ऑपरेटर हैं. हालांकि, अधिकृत नेटवर्क से बाहर चलने वाली बसें और दूसरे राज्यों के ऑपरेटरों की अनधिकृत गतिविधियां भी विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं. दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि जांच के दौरान अनधिकृत जगहों पर बस रोकने, काली फिल्म के इस्तेमाल और परमिट की शर्तों का उल्लंघन करते हुए स्लीपर बस सेवाएं चलाने जैसे मामले सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में जरूरत पड़ने पर परमिट निलंबित या रद्द करने समेत सख्त कार्रवाई की जाएगी.

पर्यटक बसों में यात्रियों का रिकॉर्ड रखना भी जरूरी

कॉन्ट्रैक्ट कैरिज और पर्यटक बसों के लिए यात्रियों का रिकॉर्ड रखना भी अनिवार्य है. नियमों के तहत टूरिस्ट वाहन संचालकों को यात्रियों के नाम, पते, उम्र और बस में चढ़ने तथा उतरने के स्थान जैसी जानकारी दर्ज करनी होती है. इस रिकॉर्ड की एक प्रति बस में भी रखनी होती है, ताकि जरूरत पड़ने पर जांच के दौरान उसे देखा जा सके. हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि इस नियम का पालन अभी भी पूरी तरह नहीं हो रहा है.

2012 के निर्भया कांड के बाद लागू हुए थे कई नियम

बसों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली में पहले भी बड़े बदलाव किए जा चुके हैं. दिसंबर 2012 के सामूहिक दरिंदगी मामले के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया था. इसके बाद 2013 में चार्टर्ड बसों के लिए जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य की गई थी. इसके अलावा बसों में पर्दे और खिड़कियों पर ऐसी फिल्म लगाने पर रोक लगाई गई थी, जिससे अंदर का दृश्य बाहर से दिखाई न दे. बस के अंदर पर्याप्त रोशनी, चालक और मालिक की जानकारी प्रदर्शित करने जैसी शर्तें भी परमिट नियमों में शामिल की गई थीं.

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