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HomeVideosबेजुबान ने चुकाया ‘ममता’ का कर्ज, 85 वर्षीय पार्वतीम्मा के शव से लिपटकर रोया बंदर, बेमिसाल वफादारी देख सबकी आंखें हुईं नम!

बेजुबान ने चुकाया ‘ममता’ का कर्ज, 85 वर्षीय पार्वतीम्मा के शव से लिपटकर रोया बंदर, बेमिसाल वफादारी देख सबकी आंखें हुईं नम!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-03 00:13:33

कर्नाटक के रामनगर जिले के चन्नापटना स्थित रायरा दोड्डी (Rayara Doddi) गांव में रहने वाली 85 वर्षीय पार्वतीम्मा का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया, पार्वतीम्मा सालों से स्थानीय मंदिर और अपने घर के पास आने वाले बंदरों को खाना खिलाती थीं, जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया, तो एक बंदर वहां पहुंचा और घंटों तक उनके शव के पास बैठा रहा, वीडियो में देखा जा सकता है कि बंदर ने पार्वतीम्मा को गले लगाया और उनके चेहरे पर अपना सिर रखकर जैसे 'अंतिम विदाई' दी, वह बंदर पूरी रात उनके पास बैठा रहा और अगली सुबह अंतिम संस्कार के समय ही वहां से गया.


85 Year Old Woman Parvatamma Monkey Hug: यह घटना विज्ञान और तर्क से परे ‘भावनाओं’ के उस संसार की है, जहां सिर्फ निस्वार्थ प्रेम मायने रखता है, पार्वतीम्मा और बंदरों के बीच का रिश्ता केवल भोजन तक सीमित नहीं था उनके परिवार के अनुसार, वे जानवरों से डरती थीं लेकिन इन बंदरों के लिए उनका दिल हमेशा खुला रहता था, चन्नापटना के ग्रामीणों ने बताया कि बंदर बहुत उदास दिख रहा था,उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि वह एक परिजन की तरह शांति से बैठकर शोक मनाता रहा, ताज्जुब की बात यह है कि भीड़ होने के बावजूद वह बंदर डरा नहीं उसने रात भर पार्वतीम्मा के शव के पास पहरा दिया आधी रात को किसी ने उसे केला दिया, जिसे खाकर वह दोबारा शव के पास लौट आया, यह वीडियो मानवता और जानवरों के बीच के सह-अस्तित्व का प्रतीक बन गया है, लोग इसे “सच्चे कर्मों की कमाई” बता रहे हैं, जिसे इंसान अपने साथ ले जाता है.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-03 00:13:33


85 Year Old Woman Parvatamma Monkey Hug: यह घटना विज्ञान और तर्क से परे ‘भावनाओं’ के उस संसार की है, जहां सिर्फ निस्वार्थ प्रेम मायने रखता है, पार्वतीम्मा और बंदरों के बीच का रिश्ता केवल भोजन तक सीमित नहीं था उनके परिवार के अनुसार, वे जानवरों से डरती थीं लेकिन इन बंदरों के लिए उनका दिल हमेशा खुला रहता था, चन्नापटना के ग्रामीणों ने बताया कि बंदर बहुत उदास दिख रहा था,उसने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि वह एक परिजन की तरह शांति से बैठकर शोक मनाता रहा, ताज्जुब की बात यह है कि भीड़ होने के बावजूद वह बंदर डरा नहीं उसने रात भर पार्वतीम्मा के शव के पास पहरा दिया आधी रात को किसी ने उसे केला दिया, जिसे खाकर वह दोबारा शव के पास लौट आया, यह वीडियो मानवता और जानवरों के बीच के सह-अस्तित्व का प्रतीक बन गया है, लोग इसे “सच्चे कर्मों की कमाई” बता रहे हैं, जिसे इंसान अपने साथ ले जाता है.

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