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HomeVideosरायबरेली में रिश्तों का कत्ल, नौकरी पर गए पति को पत्नी ने कागजों में ‘मार’ गिराया, जायदाद के लिए उजाड़ा सुहाग!

रायबरेली में रिश्तों का कत्ल, नौकरी पर गए पति को पत्नी ने कागजों में ‘मार’ गिराया, जायदाद के लिए उजाड़ा सुहाग!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-19 11:02:56

रायबरेली के रहने वाले दिनेश मिश्रा के साथ उनके ही परिवार ने ऐसी धोखाधड़ी की है जो किसी फिल्मी विलेन से कम नहीं है, हरियाणा के सोनीपत में नौकरी करने वाले दिनेश को उनकी पत्नी और बेटे ने सरकारी कागजों में 'मृत' घोषित करवा दिया इतना ही नहीं, फर्जी डेथ सर्टिफिकेट के सहारे सारी संपत्ति भी अपने नाम करवा ली, अब दिनेश पिछले 3 साल से खुद को जिंदा साबित करने की जंग लड़ रहे हैं.


Sonipat Job Raebareli Family Fraud: रिश्तों के कत्ल और लालच की यह दास्तान रायबरेली की है, पीड़ित दिनेश मिश्रा रोजी-रोटी के चक्कर में सोनीपत में नौकरी करते थे, जबकि गांव में उनकी पत्नी और बेटा रहते थे, पीछे से इन दोनों ने मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई और दिनेश का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिया, इस फर्जीवाड़े के जरिए उन्होंने दिनेश की सारी चल-अचल संपत्ति चुपचाप अपने नाम ट्रांसफर करा ली. जब दिनेश को इस धोखे का पता चला, तो उनके होश उड़ गए, पिछले 3 साल से वह एक विभाग से दूसरे विभाग की दौड़ लगा रहे हैं और चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि वह मरे नहीं बल्कि जिंदा हैं,  तंत्र की सुस्ती देखिए कि एक जीवित व्यक्ति को खुद के जिंदा होने का सबूत देने में 3 साल लग गए, अब जाकर एडीएम ने मामले की गंभीरता को समझा है और पूरी साजिश की जांच के आदेश दिए हैं, क्या दिनेश को उनकी जायदाद वापस मिलेगी या सिस्टम की फाइलों में वह ‘मुर्दा’ ही रहेंगे?

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-19 11:02:56


Sonipat Job Raebareli Family Fraud: रिश्तों के कत्ल और लालच की यह दास्तान रायबरेली की है, पीड़ित दिनेश मिश्रा रोजी-रोटी के चक्कर में सोनीपत में नौकरी करते थे, जबकि गांव में उनकी पत्नी और बेटा रहते थे, पीछे से इन दोनों ने मिलकर एक खौफनाक योजना बनाई और दिनेश का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिया, इस फर्जीवाड़े के जरिए उन्होंने दिनेश की सारी चल-अचल संपत्ति चुपचाप अपने नाम ट्रांसफर करा ली. जब दिनेश को इस धोखे का पता चला, तो उनके होश उड़ गए, पिछले 3 साल से वह एक विभाग से दूसरे विभाग की दौड़ लगा रहे हैं और चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि वह मरे नहीं बल्कि जिंदा हैं,  तंत्र की सुस्ती देखिए कि एक जीवित व्यक्ति को खुद के जिंदा होने का सबूत देने में 3 साल लग गए, अब जाकर एडीएम ने मामले की गंभीरता को समझा है और पूरी साजिश की जांच के आदेश दिए हैं, क्या दिनेश को उनकी जायदाद वापस मिलेगी या सिस्टम की फाइलों में वह ‘मुर्दा’ ही रहेंगे?

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