यह खबर एक पिता की गरीबी और एक बच्चे की बेबसी की वो दास्तां है जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पिघल जाए, रेबीज के अधूरे इलाज ने एक हंसते-खेलते बच्चे को ऐसी हालत में पहुंचा दिया है जहां वह अब इंसानों की भाषा भूलकर कुत्तों की तरह व्यवहार कर रहा है, यह मामला समाज की उन दोहरी नीतियों पर सवाल उठाता है जहां जानवरों के अधिकार तो शोर मचाते हैं, पर एक गरीब की जान खामोशी से दम तोड़ देती है.
Rabies Victim Boy Barking Video: महीनों पहले जब एक कुत्ते ने उस मासूम को काटा था, तो शायद किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिव्यांग पिता की लाचारी इस कदर भारी पड़ेगी, अस्पताल की दूरी या पैसों की तंगी की वजह जो भी रही हो, लेकिन टीके की केवल दो खुराक उस जानलेवा वायरस को रोकने के लिए काफी नहीं थीं, आज वह बच्चा हाइड्रोफोबिया के उस खतरनाक दौर में है जहां उसे पानी से डर लगता है और वह कुत्तों की तरह भौंकने लगा है, डॉक्टरों की ‘जीरो चांस’ वाली चेतावनी के बीच यह मासूम अपनी आखिरी लड़ाई लड़ रहा है, यह घटना सोशल मीडिया पर उन तथाकथित ‘एक्टिविस्ट्स’ के लिए एक बड़ा सवाल है जो आवारा कुत्तों के हमलों पर चुप्पी साध लेते हैं, क्या एक बेजुबान जानवर का बचाव एक इंसान के बच्चे की जान से बड़ा है? अब यह सवाल लोगो के ज़ुबान पर है, इस बच्चे की हर ‘भौंक’ उस सिस्टम के गाल पर तमाचा है जो मुफ़्त टीकाकरण का दावा तो करता है, लेकिन एक दिव्यांग बाप तक उसे पहुंचा नहीं पाता.
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