एक युवा डॉक्टर का आरोप है कि उनकी महिला बॉस द्वारा उन पर दबाव बनाया जाता था कि वे लगभग हर मरीज को अस्पताल में भर्ती (Admit) करें, चाहे उसकी स्थिति वैसी ना भी हो इतना ही नहीं, डॉक्टर ने यह भी दावा किया कि अस्पताल का बिल बढ़ाने के उद्देश्य से मरीजों के ICU स्टे को जबरन लंबा खींचा जाता था, डॉक्टर ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि उनके लिए मरीज की सुरक्षा और ईमान किसी भी बड़ी सैलरी से ऊपर है.
Young Doctor Resigns Over Medical Ethics: यह घटना हेल्थकेयर सेक्टर में कॉर्पोरेट लालच और एक डॉक्टर के कर्तव्य के बीच के संघर्ष को दर्शाती है, डॉक्टर को निर्देश दिए गए थे कि वह ओपीडी (OPD) के मरीजों को भी भर्ती होने की सलाह दें, ताकि अस्पताल का रेवेन्यू बढ़ सके गंभीर रूप से बीमार ना होने के बावजूद या ठीक हो चुके मरीजों को भी ICU में रखने का दबाव बनाना स्वास्थ्य सेवा के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है, युवा डॉक्टर का यह कदम उन हजारों मेडिकल प्रोफेशनल्स के लिए प्रेरणा है जो सिस्टम के दबाव में घुट रहे हैं, उनका मानना है कि डॉक्टर का पहला कर्तव्य मरीज को स्वस्थ करना है, ना कि उसे कर्ज में डुबोना इस खुलासे के बाद आम जनता के बीच निजी अस्पतालों के खिलाफ भारी आक्रोश है और लोग डॉक्टर के इस साहसी निर्णय की सराहना कर रहे हैं.
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