Live
Search
HomeVideosटीली तारों के बीच छिपे हैं वो ‘खतरनाक रास्ते’, जहां फेंसिंग के बावजूद सीना तानकर हो रही है घुसपैठ!

टीली तारों के बीच छिपे हैं वो ‘खतरनाक रास्ते’, जहां फेंसिंग के बावजूद सीना तानकर हो रही है घुसपैठ!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-01-30 20:55:10

भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के ऊपर से सामान पास करने का वीडियो वायरल होने के बाद बॉर्डर सिक्योरिटी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब 'स्मार्ट फेंसिंग' और 'थर्मल ड्रोन' की जरूरत महसूस की जा रही है.


India Bangladesh Border Security: भारत और बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और रिपोर्ट्स में देखा जा सकता है कि कैसे पश्चिम बंगाल के इलाकों में लोग फेंसिंग (बाड़) के ऊपर से सामान के बॉक्स एक-दूसरे को पास कर रहे हैं, यहां किसी हाई-टेक मशीन की ज़रूरत नहीं, बल्कि इंसानी तालमेल से कटीली तारों को मात दी जा रही है, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ लोहे की बाड़ लगाना काफी नहीं है, क्योंकि घुसपैठिए और तस्कर उन रास्तों को ढूंढ लेते हैं जहां निगरानी कम है, अब मांग उठ रही है कि बॉर्डर पर थर्मल ड्रोन और स्मार्ट सर्विलांस जैसी तकनीक का इस्तेमाल 24 घंटे किया जाए, ताकि सरहद के इस पार और उस पार होने वाली हर छोटी हलचल को पकड़ा जा सके.

MORE NEWS

Home > वीडियो > टीली तारों के बीच छिपे हैं वो ‘खतरनाक रास्ते’, जहां फेंसिंग के बावजूद सीना तानकर हो रही है घुसपैठ!

टीली तारों के बीच छिपे हैं वो ‘खतरनाक रास्ते’, जहां फेंसिंग के बावजूद सीना तानकर हो रही है घुसपैठ!

भारत-बांग्लादेश सीमा पर फेंसिंग के ऊपर से सामान पास करने का वीडियो वायरल होने के बाद बॉर्डर सिक्योरिटी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए अब 'स्मार्ट फेंसिंग' और 'थर्मल ड्रोन' की जरूरत महसूस की जा रही है.

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-01-30 20:55:10

Mobile Ads 1x1

India Bangladesh Border Security: भारत और बांग्लादेश की सीमा पर सुरक्षा को लेकर एक नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और रिपोर्ट्स में देखा जा सकता है कि कैसे पश्चिम बंगाल के इलाकों में लोग फेंसिंग (बाड़) के ऊपर से सामान के बॉक्स एक-दूसरे को पास कर रहे हैं, यहां किसी हाई-टेक मशीन की ज़रूरत नहीं, बल्कि इंसानी तालमेल से कटीली तारों को मात दी जा रही है, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ लोहे की बाड़ लगाना काफी नहीं है, क्योंकि घुसपैठिए और तस्कर उन रास्तों को ढूंढ लेते हैं जहां निगरानी कम है, अब मांग उठ रही है कि बॉर्डर पर थर्मल ड्रोन और स्मार्ट सर्विलांस जैसी तकनीक का इस्तेमाल 24 घंटे किया जाए, ताकि सरहद के इस पार और उस पार होने वाली हर छोटी हलचल को पकड़ा जा सके.

MORE NEWS