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HomeVideosईरानी शेरनियों की ‘खामोश’ बगावत: एशियाई कप के मैदान में राष्ट्रगान गाने से किया इनकार; दुनिया के सामने तानाशाही को दी खुली चुनौती!

ईरानी शेरनियों की ‘खामोश’ बगावत: एशियाई कप के मैदान में राष्ट्रगान गाने से किया इनकार; दुनिया के सामने तानाशाही को दी खुली चुनौती!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-03 13:04:46

Asian Cup Iran Anthem Boycott: ईरान में चल रहे नागरिक असंतोष और महिला अधिकारों की लड़ाई अब फुटबॉल के मैदान तक पहुंच गई है, एशियाई कप जैसे बड़े वैश्विक मंच पर ईरान की महिला टीम ने अपने देश का राष्ट्रगान ना गाकर एक शक्तिशाली राजनीतिक बयान दिया है, यह पहली बार नहीं है जब ईरानी एथलीटों ने ऐसा किया हो, लेकिन महिला टीम का यह सामूहिक फैसला शासन के लिए एक बड़ा झटका है, यह विरोध उन हजारों महिलाओं और प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता दिखाने का तरीका है जो ईरान की सड़कों पर 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' के नारे के साथ संघर्ष कर रहे हैं, इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इन खिलाड़ियों की बहादुरी की तारीफ हो रही है, वहीं इस बात का डर भी बना हुआ है कि स्वदेश लौटने पर इन पर शासन का क्या शिकंजा कसेगा?


एशियाई कप के उद्घाटन मैच यानी इनॉगरल मैच के दौरान ईरानी महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने इतिहास रच दिया, जब स्टेडियम में ईरान का राष्ट्रगान बज रहा था, तो पूरी टीम ने एक साथ उसे गाने से इनकार कर दिया और चुपचाप खड़ी रही, यह विरोध ईरान के इस्लामी शासन और वहां महिलाओं के दमन के खिलाफ एक खुला विद्रोह है, कैमरे की नजर में कैद इन महिला खिलाड़ियों के चेहरों पर जो गंभीरता थी, उसने पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि वे अपनी आज़ादी और अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं, चाहे परिणाम जो भी हों.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-03 13:04:46


एशियाई कप के उद्घाटन मैच यानी इनॉगरल मैच के दौरान ईरानी महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने इतिहास रच दिया, जब स्टेडियम में ईरान का राष्ट्रगान बज रहा था, तो पूरी टीम ने एक साथ उसे गाने से इनकार कर दिया और चुपचाप खड़ी रही, यह विरोध ईरान के इस्लामी शासन और वहां महिलाओं के दमन के खिलाफ एक खुला विद्रोह है, कैमरे की नजर में कैद इन महिला खिलाड़ियों के चेहरों पर जो गंभीरता थी, उसने पूरी दुनिया को यह संदेश दे दिया है कि वे अपनी आज़ादी और अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं, चाहे परिणाम जो भी हों.

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