दिल्ली के प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर में एक युवती और उसकी बुजुर्ग मां के साथ हुए भेदभाव ने सोशल मीडिया पर 'VIP कल्चर' के खिलाफ जंग छेड़ दी है, पीड़िता का आरोप है कि मंदिर प्रशासन ने रसूखदारों और VIPs के लिए अलग और सुगम रास्ता बना रखा है, जबकि घंटों से लाइन में लगे आम भक्तों के पास दर्शन का कोई ढंग का विकल्प नहीं था, इस भेदभावपूर्ण व्यवहार ने यह कड़वा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब मंदिरों में भी 'EWS रिजर्वेशन' जैसा भेदभाव शुरू हो गया है, जहां भक्ति की जगह जेब की गहराई देखी जाती है?
Kalkaji Temple VIP Culture Controversy 2026: यह घटना हमारी आस्था के केंद्रों में गहरे पैठ कर चुके विशेषाधिकार (Privilege) के संकट को उजागर करती है, अपनी मां के साथ बड़ी श्रद्धा लेकर कालकाजी मंदिर पहुंची एक लड़की को तब गहरा झटका लगा जब उसने देखा कि आस्था का बाजार सज चुका है, जहां एक तरफ रसूखदार लोग बिना किसी परेशानी के भगवान के दर्शन कर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ साधारण भक्त बुजुर्ग और महिलाएं भीड़ में पिस रहे थे, लड़की ने अपना दर्द साझा करते हुए मंदिर की तुलना शिक्षा और नौकरियों के कोटे से कर दी और कहा कि यहां की VIP एंट्री किसी ‘EWS रिजर्वेशन’ से कम नहीं लगती, यह विडंबना ही है कि जिस ईश्वर की नज़र में सब बराबर हैं, उसी के घर के बाहर इंसानों ने ‘पैसों और पहुंच’ की दीवार खड़ी कर दी है, आम भक्तों के पास ना तो बैठने की व्यवस्था थी और ना ही सुचारु दर्शन की मंदिर समितियों का यह रवैया ना केवल श्रद्धा को ठेस पहुंचता है, बल्कि उन हजारों लोगों का अपमान है जो मीलों दूर से अपनी आखिरी उम्मीद लेकर यहां पहुंचते हैं.
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