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HomeVideosना दिहाड़ी मिल रही, ना सिलेंडर, एक हफ्ते से भूखे परिवार के लिए बिलख पड़ी महिला, बेबसी के आंसुओं ने मचाया बवाल

ना दिहाड़ी मिल रही, ना सिलेंडर, एक हफ्ते से भूखे परिवार के लिए बिलख पड़ी महिला, बेबसी के आंसुओं ने मचाया बवाल

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-15 08:47:17

देश में जारी गैस सिलेंडर (LPG) के संकट ने अब आम आदमी के घर के चूल्हे बुझा दिए हैं, एक तरफ कतारों में खड़ी जनता है और दूसरी तरफ एक मां के आंसू, जो एक हफ्ते से सिलेंडर के लिए भटक रही है, महिला का दर्द उस वक्त छलक उठा जब उसने बताया कि वह अपने बच्चों का पेट भरने के लिए कमाती भी है और सिलेंडर की लाइन में भी लगती है, लेकिन खाली सिलेंडर भरने का नाम नहीं ले रहा.


Mother Crying For Food LPG Gas Shortage Crisis 2026: गैस संकट की यह तस्वीर किसी भी भावुक व्यक्ति को हिलाकर रख देने वाली है एक महिला, जो पिछले एक हफ्ते से गैस एजेंसी और कतारों के चक्कर काट रही है, कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़ी, उसकी सिसकियों में केवल गैस ना मिलने का गुस्सा नहीं, बल्कि अपने बच्चों को भूखा देखने का असहनीय दर्द था, महिला ने रोते हुए बयान दिया कि, लाइन में लगने के कारण दिहाड़ी (मजदूरी) भी हाथ से निकल जाती है और सिलेंडर भी नहीं मिलता, घर में एक हफ्ते से खाना नहीं बना है, किसी तरह बच्चों को थोड़ा-बहुत खिला देते हैं और खुद खाली पेट सो जाते हैं, यह आंसू उस सरकारी व्यवस्थाकी गवाही दे रहे हैं, जहां दावे तो ‘उज्ज्वला’ और ‘विकास’ के किए जाते हैं, लेकिन धरती पर एक मां को अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए सड़कों पर रोना पड़ रहा है, महिला की इस चुप्पी टूटने के बाद सोशल मीडिया पर गैस डिलीवरी को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है.

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Last Updated: 2026-03-15 08:47:17


Mother Crying For Food LPG Gas Shortage Crisis 2026: गैस संकट की यह तस्वीर किसी भी भावुक व्यक्ति को हिलाकर रख देने वाली है एक महिला, जो पिछले एक हफ्ते से गैस एजेंसी और कतारों के चक्कर काट रही है, कैमरे के सामने फूट-फूटकर रो पड़ी, उसकी सिसकियों में केवल गैस ना मिलने का गुस्सा नहीं, बल्कि अपने बच्चों को भूखा देखने का असहनीय दर्द था, महिला ने रोते हुए बयान दिया कि, लाइन में लगने के कारण दिहाड़ी (मजदूरी) भी हाथ से निकल जाती है और सिलेंडर भी नहीं मिलता, घर में एक हफ्ते से खाना नहीं बना है, किसी तरह बच्चों को थोड़ा-बहुत खिला देते हैं और खुद खाली पेट सो जाते हैं, यह आंसू उस सरकारी व्यवस्थाकी गवाही दे रहे हैं, जहां दावे तो ‘उज्ज्वला’ और ‘विकास’ के किए जाते हैं, लेकिन धरती पर एक मां को अपने बच्चों की भूख मिटाने के लिए सड़कों पर रोना पड़ रहा है, महिला की इस चुप्पी टूटने के बाद सोशल मीडिया पर गैस डिलीवरी को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है.

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