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HomeVideosशिक्षा के मंदिर में ‘राजशाही’ ठाट, सरकारी स्कूल की हेडमिस्ट्रेस मधु कुमारी ने मासूमों को बनाया ‘गुलाम’, देखें वायरल वीडियो!

शिक्षा के मंदिर में ‘राजशाही’ ठाट, सरकारी स्कूल की हेडमिस्ट्रेस मधु कुमारी ने मासूमों को बनाया ‘गुलाम’, देखें वायरल वीडियो!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: March 6, 2026 20:36:31 IST

Government School Teacher Exploiting Students: यह घटना केवल अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि एक गहरी सामंती और शोषक मानसिकता का प्रमाण है, हेडमिस्ट्रेस मधु कुमारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए छोटे बच्चों को अपनी निजी सुख-सुविधा का साधन बना लिया है, जिस वक्त क्लास में ब्लैकबोर्ड पर अक्षर लिखे होने चाहिए थे, उस वक्त मैडम आराम फरमा रही थीं और मासूम बच्चे उनके थके हुए हाथ-पैर दबा रहे थे, यह सीधे तौर पर बाल श्रम और मानवाधिकारों का उल्लंघन है, सबसे बड़ा सवाल उस सिस्टम पर खड़ा होता है जो इन शिक्षकों को मोटी तनख्वाह तो देता है, लेकिन इनके आचरण पर लगाम नहीं कस पाता, जब तक सरकारी स्कूलों की मॉनिटरिंग के लिए कड़े नियम नहीं बनेंगे और बड़े राजनेताओं के बच्चे इन टाट-पट्टी वाले स्कूलों में नहीं बैठेंगे, तब तक मधु कुमारी जैसे लोग गरीबों के बच्चों को अपना 'गुलाम' समझते रहेंगे?


सरकारी स्कूल की दहलीज पर जहां गरीब का बच्चा सुनहरे भविष्य का सपना लेकर आता है, वहां हेडमिस्ट्रेस मधु कुमारी (Madhu Kumari) ने एक शर्मनाक मिसाल पेश की है, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि पढ़ाई-लिखाई छोड़कर बच्चे अपनी मैडम की सेवा में लगे हैं, कोई उनके हाथ दबा रहा है तो कोई पैर, ये वो बच्चे हैं जो SC, ST, OBC और गरीब सामान्य वर्ग से आते हैं और जिनके माता-पिता उन्हें इस उम्मीद में भेजते हैं कि वे पढ़-लिखकर अफ़सर बनेंगे, ना कि किसी हेडमिस्ट्रेस के निजी ‘मसाज अटेंडेंट’ बनेंगे.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: March 6, 2026 20:36:31 IST


सरकारी स्कूल की दहलीज पर जहां गरीब का बच्चा सुनहरे भविष्य का सपना लेकर आता है, वहां हेडमिस्ट्रेस मधु कुमारी (Madhu Kumari) ने एक शर्मनाक मिसाल पेश की है, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ़ दिख रहा है कि पढ़ाई-लिखाई छोड़कर बच्चे अपनी मैडम की सेवा में लगे हैं, कोई उनके हाथ दबा रहा है तो कोई पैर, ये वो बच्चे हैं जो SC, ST, OBC और गरीब सामान्य वर्ग से आते हैं और जिनके माता-पिता उन्हें इस उम्मीद में भेजते हैं कि वे पढ़-लिखकर अफ़सर बनेंगे, ना कि किसी हेडमिस्ट्रेस के निजी ‘मसाज अटेंडेंट’ बनेंगे.

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