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HomeVideosममता बनर्जी का हल्ला बोल, रसोई की महंगाई को बनाया चुनावी ढाल, बंगाल की हर महिला तक पहुंचाया ‘दीदी’ का संदेश!

ममता बनर्जी का हल्ला बोल, रसोई की महंगाई को बनाया चुनावी ढाल, बंगाल की हर महिला तक पहुंचाया ‘दीदी’ का संदेश!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-17 18:34:16

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) ने राज्य में गहराते एलपीजी संकट और बढ़ती कीमतों के विरोध में कोलकाता की सड़कों पर एक विशाल मार्च निकाला, विधानसभा चुनाव 2026 के ऐन पहले किए गए इस प्रदर्शन का उद्देश्य केंद्र सरकार को घेरना और खुद को जनता के असल मुद्दों रसोई की महंगाई के साथ खड़ा दिखाना है.


Mamata Banerjee LPG Protest March Kolkata 2026: बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी को ‘नैरेटिव’ सेट करने की महारथी माना जाता है, 15 साल तक राज्य की सत्ता संभालने के बावजूद, वे खुद को एक मुख्यमंत्री से ज्यादा एक ‘आंदोलनकारी’ के रूप में पेश करने में सफल रही हैं, ताजा विरोध प्रदर्शन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल युद्ध) के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और भारत में बढ़ती एलपीजी की कीमतों को उन्होंने सीधे चुनावी मुद्दा बना दिया है, ममता का यह मार्च कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक आम लोगों, विशेषकर महिलाओं को यह संदेश देने के लिए है कि उनकी समस्याओं के लिए केंद्र की ‘गलत नीतियां’ जिम्मेदार हैं, जब एक सामान्य नागरिक गैस के लिए लाइन में खड़ा है, तो सड़क पर उतरी ‘दीदी’ की तस्वीर उसके मन में यह नैरेटिव पक्का कर देती है कि केवल वे ही उसके हक की लड़ाई लड़ रही हैं, यह “आम आदमी बनाम दिल्ली” का वही नैरेटिव है जिसने उन्हें 2021 में भारी जीत दिलाई थी और अब 2026 के लिए भी बिसात बिछाई जा रही है.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-17 18:34:16


Mamata Banerjee LPG Protest March Kolkata 2026: बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी को ‘नैरेटिव’ सेट करने की महारथी माना जाता है, 15 साल तक राज्य की सत्ता संभालने के बावजूद, वे खुद को एक मुख्यमंत्री से ज्यादा एक ‘आंदोलनकारी’ के रूप में पेश करने में सफल रही हैं, ताजा विरोध प्रदर्शन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, पश्चिम एशिया (ईरान-इजरायल युद्ध) के कारण पैदा हुए ऊर्जा संकट और भारत में बढ़ती एलपीजी की कीमतों को उन्होंने सीधे चुनावी मुद्दा बना दिया है, ममता का यह मार्च कॉलेज स्क्वायर से डोरिना क्रॉसिंग तक आम लोगों, विशेषकर महिलाओं को यह संदेश देने के लिए है कि उनकी समस्याओं के लिए केंद्र की ‘गलत नीतियां’ जिम्मेदार हैं, जब एक सामान्य नागरिक गैस के लिए लाइन में खड़ा है, तो सड़क पर उतरी ‘दीदी’ की तस्वीर उसके मन में यह नैरेटिव पक्का कर देती है कि केवल वे ही उसके हक की लड़ाई लड़ रही हैं, यह “आम आदमी बनाम दिल्ली” का वही नैरेटिव है जिसने उन्हें 2021 में भारी जीत दिलाई थी और अब 2026 के लिए भी बिसात बिछाई जा रही है.

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