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HomeVideosनमक की बोरी में आईं भवानी! जानें कब उमड़ता है भक्तों का सैलाब, क्यों आज भी बनिया परिवार करता है पहली आरती?

नमक की बोरी में आईं भवानी! जानें कब उमड़ता है भक्तों का सैलाब, क्यों आज भी बनिया परिवार करता है पहली आरती?

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-19 14:46:03

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित माता बाला सुंदरी त्रिलोकपुर मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, कहा जाता है कि वर्ष 1573 में माता एक स्थानीय बनिया की नमक की बोरी में छिपकर देवबंद से यहां पहुंची थीं, कई दिनों तक नमक बेचने के बाद भी जब वह खत्म नहीं हुआ, तब माता ने स्वप्न में दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया, आज यहां माता अपने बाल रूप में पिंडी स्वरूप में विराजमान हैं.


Mata Bala Sundari Trilokpur History: उत्तर भारत की प्रसिद्ध सिद्धपीठ त्रिलोकपुर माता बाला सुंदरी के नाम से विख्यात है, यहां की सबसे रोचक और चमत्कारी बात यह है कि माता यहां नमक की बोरी के जरिए पहुंची थीं, लोककथाओं के अनुसार, एक स्थानीय दुकानदार जब देवबंद से नमक की बोरियां लेकर आया, तो उसे एहसास हुआ कि एक बोरी का नमक खत्म ही नहीं हो रहा है, माता ने उसे दर्शन दिए और बताया कि वह स्वयं बाला सुंदरी हैं, तत्कालीन सिरमौर रियासत के महाराज को भी माता ने स्वप्न में आदेश दिया, जिसके बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया आज भी परंपरा के अनुसार, मंदिर की मुख्य आरती उसी बनिया परिवार के वंशजों द्वारा की जाती है, चैत्र नवरात्र के अवसर पर यहां हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं, प्रशासन ने इस वर्ष भी सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि भक्त सुगमता से माता के बाल स्वरूप के दर्शन कर सकें, मंदिर के पुजारी आचार्य राजेश के अनुसार, यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-19 14:46:03


Mata Bala Sundari Trilokpur History: उत्तर भारत की प्रसिद्ध सिद्धपीठ त्रिलोकपुर माता बाला सुंदरी के नाम से विख्यात है, यहां की सबसे रोचक और चमत्कारी बात यह है कि माता यहां नमक की बोरी के जरिए पहुंची थीं, लोककथाओं के अनुसार, एक स्थानीय दुकानदार जब देवबंद से नमक की बोरियां लेकर आया, तो उसे एहसास हुआ कि एक बोरी का नमक खत्म ही नहीं हो रहा है, माता ने उसे दर्शन दिए और बताया कि वह स्वयं बाला सुंदरी हैं, तत्कालीन सिरमौर रियासत के महाराज को भी माता ने स्वप्न में आदेश दिया, जिसके बाद यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया आज भी परंपरा के अनुसार, मंदिर की मुख्य आरती उसी बनिया परिवार के वंशजों द्वारा की जाती है, चैत्र नवरात्र के अवसर पर यहां हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लाखों श्रद्धालु शीश नवाने पहुंचते हैं, प्रशासन ने इस वर्ष भी सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं ताकि भक्त सुगमता से माता के बाल स्वरूप के दर्शन कर सकें, मंदिर के पुजारी आचार्य राजेश के अनुसार, यहां आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता.

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