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HomeVideosनमो भारत की रफ़्तार पर सन्नाटे ने खड़े किये सवाल, मेरठ में गूंजा ‘भारत माता की जय’, कुछ चेहरों पर छायी खामोशी!

नमो भारत की रफ़्तार पर सन्नाटे ने खड़े किये सवाल, मेरठ में गूंजा ‘भारत माता की जय’, कुछ चेहरों पर छायी खामोशी!

Written By: Aksha Choudhary
Edited By: Hasnain Alam
Last Updated: 2026-02-24 17:41:51

मेरठ-दिल्ली कॉरिडोर के उद्घाटन ने ना केवल सफर की दूरी कम की, बल्कि समाज के बीच की एक गहरी खाई को भी उजागर कर दिया, उद्घाटन समारोह में जब देशभक्ति के नारों की गूंज थी, तब कुछ लोगों की 'रहस्यमयी खामोशी' चर्चा का विषय बन गई, सवाल उठ रहे हैं कि जो लोग देश की सड़कों, ट्रेनों और सुरक्षा का पूरा लाभ उठाते हैं, उन्हें उसी मिट्टी की जयकार करने में संकोच क्यों? क्या यह चुप्पी जानबूझकर किसी विशेष विचारधारा या धर्म को दिखाने के लिए थी या फिर वे लोग केवल अपनी खुशी को खामोशी से महसूस कर रहे थे? यह विरोधाभास आज 'न्यू इंडिया' के सामने एक बड़ा सवाल है—क्या राष्ट्रीय गौरव के क्षणों में भी हमारी वफादारी बंटी हुई हो सकती है? "नमक इस मिट्टी का, और चुप्पी वतन की शान पर?" यह बहस अब पूरे मेरठ में आग की तरह फैल रही है.


Namo Bharat RRTS Delhi Meerut corridor: 22 फरवरी 2026 की वो तारीख, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भारत के सबसे तेज क्षेत्रीय ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का तोहफा मेरठ और दिल्ली को दिया, 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती ‘नमो भारत’ ट्रेन के साथ ही मेरठ के स्टेशनों पर राष्ट्रवाद का सैलाब उमड़ पड़ा, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से आसमान गूंज उठा लेकिन, इसी भारी भीड़ के बीच एक ऐसा मंजर भी दिखा जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया, जहां एक तरफ जनता देश की इस महान उपलब्धि पर झूम रही थी, वहीं भीड़ का एक हिस्सा पूरी तरह खामोश खड़ा था, उनके होंठों से राष्ट्र के सम्मान में एक शब्द भी नहीं निकला, यह नजारा देख लोग अब सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या विकास के फायदों में बराबर के हिस्सेदार होने के बावजूद, वतन की जयकार लगाने में कोई मजहबी रुकावट थी या यह महज एक संयोग?

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Written By: Aksha Choudhary
Edited By: Hasnain Alam
Last Updated: 2026-02-24 17:41:51


Namo Bharat RRTS Delhi Meerut corridor: 22 फरवरी 2026 की वो तारीख, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भारत के सबसे तेज क्षेत्रीय ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) का तोहफा मेरठ और दिल्ली को दिया, 180 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ती ‘नमो भारत’ ट्रेन के साथ ही मेरठ के स्टेशनों पर राष्ट्रवाद का सैलाब उमड़ पड़ा, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से आसमान गूंज उठा लेकिन, इसी भारी भीड़ के बीच एक ऐसा मंजर भी दिखा जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया, जहां एक तरफ जनता देश की इस महान उपलब्धि पर झूम रही थी, वहीं भीड़ का एक हिस्सा पूरी तरह खामोश खड़ा था, उनके होंठों से राष्ट्र के सम्मान में एक शब्द भी नहीं निकला, यह नजारा देख लोग अब सोशल मीडिया पर पूछ रहे हैं कि क्या विकास के फायदों में बराबर के हिस्सेदार होने के बावजूद, वतन की जयकार लगाने में कोई मजहबी रुकावट थी या यह महज एक संयोग?

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