उत्तर प्रदेश के नोएडा में काम करने वाली एक महिला श्रमिक की आपबीती सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जो गरीबी के सबसे वीभत्स चेहरे को दिखाती है, महिला ने रोते हुए बताया कि उसकी मूल दिहाड़ी मात्र ₹300 है, और जब वह रात-दिन एक कर ओवरटाइम करती है तब जाकर उसे ₹700 मिलते हैं सबसे ज्यादा हृदयविदारक बात यह है कि वह अपने बीमार बच्चे की दवा इसलिए रोज नहीं दे पाती क्योंकि उसे डर है कि दवा जल्दी खत्म हो जाएगी और उसके पास दोबारा खरीदने के पैसे नहीं होंगे.
Noida Woman Worker Emotional Video: यह कहानी केवल एक महिला की नहीं, बल्कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा की उन हज़ारों फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों की है जो ‘न्यूनतम वेतन’ के लिए संघर्ष कर रहे हैं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार दवा का कोर्स अधूरा छोड़ना या गैप देना जानलेवा हो सकता है, लेकिन एक मां के लिए ‘पैसे की कमी’ चिकित्सा विज्ञान से बड़ी बाधा बन गई है, ₹700 वह भी ओवरटाइम के बाद में नोएडा जैसे शहर में कमरा किराया, राशन और बीमारी का खर्च उठाना नामुमकिन जैसा है, यह घटना दिखाती है कि इन श्रमिकों के पास ना तो कोई बीमा (ESIC) प्रभावी रूप से काम कर रहा है, ना ही उनके पास कोई ‘इमरजेंसी फंड’ है, महिला का वीडियो उन लोगों के लिए एक आईना है जो शहर की तरक्की को केवल जीडीपी (GDP) के आंकड़ों से नापते हैं, जबकि धरातल पर एक मां अपने बच्चे की दवा की बूंदें गिन रही है.
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