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राघव चड्ढा ने संसद में पार की ‘शर्म की दीवार’! 35 करोड़ महिलाओं के हक में बोला वह सच, जिसे सुनकर दंग रह जाएंगे आप

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-15 08:11:51

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने संसद में भारत की 35 करोड़ महिलाओं की गरिमा और स्वास्थ्य का मुद्दा उठाकर सबको चौंका दिया, उन्होंने सैनिटरी पैड को अखबार में लपेटकर बेचने की प्रथा और स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए प्राइवेसी की कमी को 'सामूहिक विफलता' करार दिया, राघव का यह भाषण सोशल मीडिया पर सनसनी मचा रहा है, लोग इस बात पर जागरूक होकर सवाल उठा रहे है.


Raghav Chadha Parliament Menstrual Hygiene Speech 2026: आज संसद में सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने उन दीवारों को गिरा दिया जिन पर हमारा समाज बात करने से कतराता है, उन्होंने मासिक धर्म (Periods) को एक ‘बायोलॉजिकल फैक्ट’ बताते हुए कहा कि इसे ‘सोशल टैबू’ (सामाजिक कलंक) बना दिया गया है, राघव ने तीखा सवाल किया कि जिस देश में शराब और सिगरेट खुलेआम बिकते हैं, वहां एक स्वास्थ्य संबंधी जरूरत यानी सैनिटरी पैड को अखबार में छिपाकर क्यों दिया जाता है? उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लाखों लड़कियां केवल पैड, पानी और प्राइवेसी ना होने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं, जो कि एक प्रगतिशील राष्ट्र के लिए शर्म की बात है, उन्होंने जोर देकर कहा कि पीरियड्स पर चुप्पी तोड़ना कोई एहसान नहीं, बल्कि समानता और मानवाधिकार का मामला है, राघव चड्ढा का यह संबोधन केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि देश की करोड़ों बेटियों की गरिमा की वह आवाज़ है जिसे दशकों से दबाया गया था.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-15 08:11:51


Raghav Chadha Parliament Menstrual Hygiene Speech 2026: आज संसद में सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadha) ने उन दीवारों को गिरा दिया जिन पर हमारा समाज बात करने से कतराता है, उन्होंने मासिक धर्म (Periods) को एक ‘बायोलॉजिकल फैक्ट’ बताते हुए कहा कि इसे ‘सोशल टैबू’ (सामाजिक कलंक) बना दिया गया है, राघव ने तीखा सवाल किया कि जिस देश में शराब और सिगरेट खुलेआम बिकते हैं, वहां एक स्वास्थ्य संबंधी जरूरत यानी सैनिटरी पैड को अखबार में छिपाकर क्यों दिया जाता है? उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि लाखों लड़कियां केवल पैड, पानी और प्राइवेसी ना होने के कारण स्कूल छोड़ देती हैं, जो कि एक प्रगतिशील राष्ट्र के लिए शर्म की बात है, उन्होंने जोर देकर कहा कि पीरियड्स पर चुप्पी तोड़ना कोई एहसान नहीं, बल्कि समानता और मानवाधिकार का मामला है, राघव चड्ढा का यह संबोधन केवल एक राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि देश की करोड़ों बेटियों की गरिमा की वह आवाज़ है जिसे दशकों से दबाया गया था.

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