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HomeVideosतिरंगे में लिपटे पिता और 8 घंटे की मासूम बेटी! सातारा में शहीद Parmod Jadhav की विदाई देख रो पड़ा पूरा देश

तिरंगे में लिपटे पिता और 8 घंटे की मासूम बेटी! सातारा में शहीद Parmod Jadhav की विदाई देख रो पड़ा पूरा देश

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: January 13, 2026 00:28:28 IST

Maharashtra Soldier Shaheed Pramod Jadhav Last Rites: महाराष्ट्र (Maharashtra) के सातारा जिले का आरे दरे गांव आज गम और गर्व के आंसू रो रहा है, देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए प्रमोद जाधव (Parmod Jadhav) का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी, सबसे भावुक पल तब आया जब उनकी पत्नी और मात्र 8 घंटे पहले जन्मी बेटी को स्ट्रेचर पर उनके अंतिम दर्शन के लिए लाया गया.


Maharashtra Soldier Shaheed Pramod Jadhav Last Rites: महाराष्ट्र (Maharashtra) के सातारा जिले का आरे दरे गांव आज गम और गर्व के आंसू रो रहा है, देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए प्रमोद जाधव (Parmod Jadhav) का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी, सबसे भावुक पल तब आया जब उनकी पत्नी और मात्र 8 घंटे पहले जन्मी बेटी को स्ट्रेचर पर उनके अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, पिता ने अपनी बेटी का चेहरा तो नहीं देखा, लेकिन पूरा गांव इस वीर सपूत की शहादत और उनके परिवार के इस असीम त्याग का एहसानमंद रहेगा.

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Maharashtra Soldier Shaheed Pramod Jadhav Last Rites: महाराष्ट्र (Maharashtra) के सातारा जिले का आरे दरे गांव आज गम और गर्व के आंसू रो रहा है, देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए प्रमोद जाधव (Parmod Jadhav) का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी, सबसे भावुक पल तब आया जब उनकी पत्नी और मात्र 8 घंटे पहले जन्मी बेटी को स्ट्रेचर पर उनके अंतिम दर्शन के लिए लाया गया.

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: January 13, 2026 00:28:28 IST

Maharashtra Soldier Shaheed Pramod Jadhav Last Rites: महाराष्ट्र (Maharashtra) के सातारा जिले का आरे दरे गांव आज गम और गर्व के आंसू रो रहा है, देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए प्रमोद जाधव (Parmod Jadhav) का पार्थिव शरीर जब तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो हर आंख नम थी, सबसे भावुक पल तब आया जब उनकी पत्नी और मात्र 8 घंटे पहले जन्मी बेटी को स्ट्रेचर पर उनके अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, पिता ने अपनी बेटी का चेहरा तो नहीं देखा, लेकिन पूरा गांव इस वीर सपूत की शहादत और उनके परिवार के इस असीम त्याग का एहसानमंद रहेगा.

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