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HomeVideosयूपी में बिना बताए ढहा दिया गरीब का आशियाना, मलबे में दबी बच्चों की किताबें और परिवार की उम्मीदें, वीडियो देख पसीज जाएगा दिल!

यूपी में बिना बताए ढहा दिया गरीब का आशियाना, मलबे में दबी बच्चों की किताबें और परिवार की उम्मीदें, वीडियो देख पसीज जाएगा दिल!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-17 10:53:14

उत्तर प्रदेश के एक गांव से मार्मिक वीडियो वायरल हो रहा है, जहां प्रशासन ने एक गरीब परिवार के घर को जमींदोज कर दिया, परिवार का आरोप है कि उन्हें कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया गया, मलबे के ढेर पर बैठकर रोते बच्चों और बेघर हुए माता-पिता की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर 'बुलडोजर नीति' के खिलाफ जन-आक्रोश का कारण बन रही हैं.


UP Bulldozer Action On Poor Family Viral Video: उत्तर प्रदेश में ‘बुलडोजर’ की कार्रवाई अक्सर सुर्खियों में रहती है, लेकिन इस बार की तस्वीर डराने वाली है, वायरल वीडियो में एक गरीब परिवार रो-रोकर अपनी आपबीती  सुना रहा है कि उनके पास इस घर के अलावा सिर छुपाने की कोई और जगह नहीं थी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार कहा है कि बुलडोजर केवल माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर चलना चाहिए और किसी गरीब की झोपड़ी नहीं उजड़नी चाहिए, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट नज़र आ रही है, प्रशासन की इस ‘तानाशाही’ ने ना केवल एक छत छीनी है, बल्कि बच्चों के भविष्य और मासूमियत को भी मलबे के नीचे दबा दिया है, विपक्षी दल और आम जनता अब सरकार से सवाल पूछ रही है कि क्या इन बेबस लोगों को भी ‘माफिया’ की श्रेणी में रखा गया है? अगर यह घर अवैध था, तो क्या कार्रवाई से पहले मानवीय आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जानी चाहिए थी? यह घटना पूरे प्रदेश को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि सत्ता का रसूख कहीं गरीबों पर कहर तो नहीं बन रहा.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-17 10:53:14


UP Bulldozer Action On Poor Family Viral Video: उत्तर प्रदेश में ‘बुलडोजर’ की कार्रवाई अक्सर सुर्खियों में रहती है, लेकिन इस बार की तस्वीर डराने वाली है, वायरल वीडियो में एक गरीब परिवार रो-रोकर अपनी आपबीती  सुना रहा है कि उनके पास इस घर के अलावा सिर छुपाने की कोई और जगह नहीं थी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार कहा है कि बुलडोजर केवल माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर चलना चाहिए और किसी गरीब की झोपड़ी नहीं उजड़नी चाहिए, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट नज़र आ रही है, प्रशासन की इस ‘तानाशाही’ ने ना केवल एक छत छीनी है, बल्कि बच्चों के भविष्य और मासूमियत को भी मलबे के नीचे दबा दिया है, विपक्षी दल और आम जनता अब सरकार से सवाल पूछ रही है कि क्या इन बेबस लोगों को भी ‘माफिया’ की श्रेणी में रखा गया है? अगर यह घर अवैध था, तो क्या कार्रवाई से पहले मानवीय आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जानी चाहिए थी? यह घटना पूरे प्रदेश को यह सोचने पर मजबूर कर रही है कि सत्ता का रसूख कहीं गरीबों पर कहर तो नहीं बन रहा.

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