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HomeVideosसहारनपुर मदरसे में ‘तालिबानी’ सजा, 10 साल के मासूम को मौलानाओं ने बेरहमी से पीटा, वीडियो देख देहल जायेगा दिल!

सहारनपुर मदरसे में ‘तालिबानी’ सजा, 10 साल के मासूम को मौलानाओं ने बेरहमी से पीटा, वीडियो देख देहल जायेगा दिल!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-05 11:45:40

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक मदरसे में 10 साल के बच्चे के साथ अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है, आरोप है कि मामूली बात पर मदरसा संचालक और शिक्षक ने बच्चे को तालिबानी सजा दी, वायरल जानकारी के अनुसार एक मौलाना (शोएब) ने बच्चे के पैर मजबूती से पकड़ रखे थे, जबकि दूसरे मौलाना (जुनैद) ने उस पर 36 डंडे बरसाए, बच्चे के शरीर पर चोट के गहरे निशान मिले हैं परिजनों की शिकायत और सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद, सहारनपुर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी जुनैद और शोएब को गिरफ्तार कर लिया है.


10 Year Old Boy Saharanpur Madarsa Case: यह घटना शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और वहां के माहौल पर बड़े सवाल खड़े करती है, एक 10 साल के बच्चे को दो वयस्क पुरुषों द्वारा इस तरह पीटना शारीरिक शोषण की चरम सीमा है, बच्चे की चीखें सुनने के बावजूद मौलानाओं का दिल नहीं पसीजा, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, आरोपियों को जेल भेज दिया गया है यह पहली बार नहीं है जब किसी मदरसे या हॉस्टल से ऐसी खबरें आई हैं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे संस्थानों की निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं ताकि मासूमों का भविष्य सुरक्षित रहे, डॉक्टर और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की पिटाई से बच्चा ना केवल शारीरिक रूप से घायल हुआ है, बल्कि वह गहरे मानसिक सदमे (Trauma) में भी है.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-04-05 11:45:40


10 Year Old Boy Saharanpur Madarsa Case: यह घटना शिक्षण संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा और वहां के माहौल पर बड़े सवाल खड़े करती है, एक 10 साल के बच्चे को दो वयस्क पुरुषों द्वारा इस तरह पीटना शारीरिक शोषण की चरम सीमा है, बच्चे की चीखें सुनने के बावजूद मौलानाओं का दिल नहीं पसीजा, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और जुवेनाइल जस्टिस (JJ) एक्ट की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है, आरोपियों को जेल भेज दिया गया है यह पहली बार नहीं है जब किसी मदरसे या हॉस्टल से ऐसी खबरें आई हैं स्थानीय लोगों ने मांग की है कि ऐसे संस्थानों की निगरानी के लिए सख्त नियम बनाए जाएं ताकि मासूमों का भविष्य सुरक्षित रहे, डॉक्टर और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की पिटाई से बच्चा ना केवल शारीरिक रूप से घायल हुआ है, बल्कि वह गहरे मानसिक सदमे (Trauma) में भी है.

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