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HomeVideosश्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में ‘सूर्यस्मरणम्’ का इंतज़ार! आखिर साल में वो कौन से दो दिन हैं, जब खिड़कियों से झांकता है सूरज?

श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर में ‘सूर्यस्मरणम्’ का इंतज़ार! आखिर साल में वो कौन से दो दिन हैं, जब खिड़कियों से झांकता है सूरज?

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-23 10:34:05

केरल के तिरुवनंतपुरम में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर अपनी अपार संपत्ति के साथ-साथ अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है, साल में दो बार होने वाले इक्विनॉक्स (Equinox) के दिन, ढलता हुआ सूरज मंदिर के गोपुरम की पांच खिड़कियों से एक-एक करके गुज़रता है, जिसे 'सूर्यस्मरणम्' कहा जाता है यह घटना प्राचीन भारतीयों की सौर गति, ज्यामिति और ओरिएंटेशन की गहरी समझ का जीवंत प्रमाण है.


Next Equinox Date 2026 Padmanabhaswamy Temple: श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का गोपुरम केवल एक प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला की तरह काम करता है, इक्विनॉक्स के दिन जब दिन और रात बराबर होते हैं, प्रकृति और कला का एक दुर्लभ मेल दिखाई देता है जैसे ही सूरज ढलना शुरू होता है, वह मंदिर की मीनार की सबसे ऊपरी खिड़की पर दिखाई देता है और फिर निश्चित अंतराल के बाद एक-एक कर नीचे की खिड़कियों से होकर गुजरता है, यह दृश्य देखने वालों को सुकून देता है कि पुराने समय में विज्ञान और आध्यात्मिकता अलग-अलग विषय नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के पूरक थे बीते शुक्रवार 20 मार्च को साल का पहला ‘स्प्रिंग इक्विनॉक्स’ निकल गया, लेकिन साल में दो बार आने वाला यह मौका किसी भी यात्री या विज्ञान प्रेमी के लिए ‘बकेट लिस्ट’ जरूर देखने वाली चीज़ों में टॉप पर होना चाहिए, कैलेंडर मार्क कर लीजिए क्योंकि अगली बार जब सूरज इन खिड़कियों से झांकेगा, तो वह अनुभव आपको सदियों पीछे उस भारत में ले जाएगा जहां तकनीक और तपस्या एक ही सिक्के के दो पहलू थे साल का दूसरा ‘सूर्यस्मरणम्’ 22 या 23 सितंबर ऑटमनल इक्विनॉक्स को होगा,

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-23 10:34:05


Next Equinox Date 2026 Padmanabhaswamy Temple: श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का गोपुरम केवल एक प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि एक प्राचीन खगोलीय वेधशाला की तरह काम करता है, इक्विनॉक्स के दिन जब दिन और रात बराबर होते हैं, प्रकृति और कला का एक दुर्लभ मेल दिखाई देता है जैसे ही सूरज ढलना शुरू होता है, वह मंदिर की मीनार की सबसे ऊपरी खिड़की पर दिखाई देता है और फिर निश्चित अंतराल के बाद एक-एक कर नीचे की खिड़कियों से होकर गुजरता है, यह दृश्य देखने वालों को सुकून देता है कि पुराने समय में विज्ञान और आध्यात्मिकता अलग-अलग विषय नहीं थे, बल्कि एक-दूसरे के पूरक थे बीते शुक्रवार 20 मार्च को साल का पहला ‘स्प्रिंग इक्विनॉक्स’ निकल गया, लेकिन साल में दो बार आने वाला यह मौका किसी भी यात्री या विज्ञान प्रेमी के लिए ‘बकेट लिस्ट’ जरूर देखने वाली चीज़ों में टॉप पर होना चाहिए, कैलेंडर मार्क कर लीजिए क्योंकि अगली बार जब सूरज इन खिड़कियों से झांकेगा, तो वह अनुभव आपको सदियों पीछे उस भारत में ले जाएगा जहां तकनीक और तपस्या एक ही सिक्के के दो पहलू थे साल का दूसरा ‘सूर्यस्मरणम्’ 22 या 23 सितंबर ऑटमनल इक्विनॉक्स को होगा,

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