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HomeVideosकौन है यह जांबाज योद्धा? मथुरा में जिसने अपनी जान पर खेलकर बुझने से बचाए 38 परिवारों के ‘चिराग’!

कौन है यह जांबाज योद्धा? मथुरा में जिसने अपनी जान पर खेलकर बुझने से बचाए 38 परिवारों के ‘चिराग’!

Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-20 15:39:51

मथुरा में एक स्कूली बस में आग लगने के बाद मची अफरा-तफरी के बीच दरोगा सतेंद्र सिंह यादव एक 'सुपरहीरो' बनकर उभरे, बस के नीचे से आग के गोले गिर रहे थे और मासूम बच्चे खतरे से बेखबर थे, दरोगा जी ने अपनी गाड़ी को बस के आगे लगाकर उसे रुकवाया और 38 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला, अब हर कोई जानना चाहता है कि आखिर कौन है यह निडर पुलिसवाला जिसने अपनी जान दांव पर लगा दी.


 Heroic Cop Saves 38 Kids Mathura: मथुरा की सड़कों पर आज एक ऐसा मंजर था जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए, एक बस जिसमें 38 बच्चे सवार थे, वह ‘चलती चिता’ बनने ही वाली थी, बस के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी, लेकिन ड्राइवर बेखबर था, तभी वहां से गुजर रहे दरोगा सतेंद्र सिंह यादव की नजर इस पर पड़ी, उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी की रफ्तार बढ़ाई और जान की परवाह किए बिना बस का पीछा किया, उन्होंने बस के आगे अपनी गाड़ी तिरछी खड़ी कर दी और चिल्लाकर बच्चों को तुरंत उतरने को कहा, जैसे ही आखिरी बच्चा बस से नीचे उतरा, लपटें आसमान छूने लगीं, लोग पूछ रहे हैं कि कौन है यह जांबाज योद्धा? यह हैं दरोगा सतेंद्र सिंह यादव, जिन्होंने साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के भीतर एक संवेदनशली और वीर दिल धड़कता है, उनकी इस तत्परता ने 38 घरों के चिरागों को बुझने से बचा लिया.

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Written By: Aksha Choudhary
Last Updated: 2026-03-20 15:39:51


 Heroic Cop Saves 38 Kids Mathura: मथुरा की सड़कों पर आज एक ऐसा मंजर था जिसे देखकर किसी का भी कलेजा कांप जाए, एक बस जिसमें 38 बच्चे सवार थे, वह ‘चलती चिता’ बनने ही वाली थी, बस के निचले हिस्से में आग लग चुकी थी, लेकिन ड्राइवर बेखबर था, तभी वहां से गुजर रहे दरोगा सतेंद्र सिंह यादव की नजर इस पर पड़ी, उन्होंने अपनी सरकारी गाड़ी की रफ्तार बढ़ाई और जान की परवाह किए बिना बस का पीछा किया, उन्होंने बस के आगे अपनी गाड़ी तिरछी खड़ी कर दी और चिल्लाकर बच्चों को तुरंत उतरने को कहा, जैसे ही आखिरी बच्चा बस से नीचे उतरा, लपटें आसमान छूने लगीं, लोग पूछ रहे हैं कि कौन है यह जांबाज योद्धा? यह हैं दरोगा सतेंद्र सिंह यादव, जिन्होंने साबित कर दिया कि खाकी वर्दी के भीतर एक संवेदनशली और वीर दिल धड़कता है, उनकी इस तत्परता ने 38 घरों के चिरागों को बुझने से बचा लिया.

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