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Chaitra Navratri Day 4: देवी कूष्मांडा की पूजा, व्रत कथा, मंत्र और वैदिक महत्व, कौन-सा रंग है शुभ

Chaitra Navratri Day 4: नवरात्रि 2026 के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा का खास महत्व है. जानें पौराणिक कथा, व्रत कथा, पूजा विधि, मंत्र, भोग और इस दिन का सबसे शुभ रंग.

Written By: Vipul Tiwary
Last Updated: March 22, 2026 08:36:13 IST

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Chaitra Navratri Day 4: नवरात्रि 2026 का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता कहा जाता है. ऐसा मान्यता है कि उनकी पूजा से ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा कर विशेष भोग अर्पित करते हैं और उनके शुभ रंगों का पालन करते हैं.

चैत्र नवरात्रि 2026 चौथा दिन

नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है. हरे रंग के अनाहत चक्र, या हृदय चक्र की देवी, मां कूष्मांडा हैं. जिनके बारे में आध्यात्मिक साधकों को जानकारी होनी जरूरी है. भय, अवसाद, चिंता या बेचैनी से ग्रस्त लोग मां कूष्मांडा की अत्यंत प्रेम और भक्ति से पूजा-अर्चना कर सकते हैं और मां दुर्गा को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ का पाठ कर सकते हैं.

चौथा दिन शुभ रंग – नारंगी

नारंगी रंग पहनने से उनमें स्फूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है क्योंकि यह साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. इसके अलावा, यह रंग जीवन में स्फूर्ति और खुशहाली लाता है. यह रंग सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति देता है. देवी मां का संस्कृत नाम कुष्मांडा है.

देवी कूष्मांडा के बारे में

ऐसा माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने सर्वप्रथम ब्रह्मांड की रचना की, तब सब कुछ अंधकारमय था. लेकिन जब उन्होंने मुस्कुराया, तो एक निराकार प्रकाश चारों ओर फैल गया, जिससे आकाशगंगा और अन्य ग्रहों सहित संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशित हो गया. इस प्रकाश ने देवी कूष्मांडा का रूप धारण किया. क्योंकि प्रकाश के बिना कहीं भी जीवन संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने शून्य से संसार की रचना की है. यह भी कहा जाता है कि देवी कूष्मांडा ऊष्मा, प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत बनीं और सूर्य को भी ये तत्व उन्हीं से प्राप्त होते हैं. आदि शक्ति, जो समस्त ऊर्जा का स्रोत हैं, मां दुर्गा का यही स्वरूप हैं. जिनके आठ हाथ हैं और उन्हें सिंहनी पर सवार दिखाया गया है. उनके दाहिने हाथ में कमंडल, धनुष बाण और कमल हैं तथा बाएं हाथ में अमृत कलश, जप माला, गदा और चक्र हैं. इस आठ हाथों के कारण ही उन्हें अष्टभुजा देवी नाम दिया गया है.

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Chaitra Navratri Day 4: नवरात्रि 2026 का चौथा दिन मां कूष्मांडा को समर्पित होता है, जिन्हें सृष्टि की रचयिता कहा जाता है. ऐसा मान्यता है कि उनकी पूजा से ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस दिन भक्त विधि-विधान से पूजा कर विशेष भोग अर्पित करते हैं और उनके शुभ रंगों का पालन करते हैं.

चैत्र नवरात्रि 2026 चौथा दिन

नवरात्रि के चौथे दिन देवी कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है. हरे रंग के अनाहत चक्र, या हृदय चक्र की देवी, मां कूष्मांडा हैं. जिनके बारे में आध्यात्मिक साधकों को जानकारी होनी जरूरी है. भय, अवसाद, चिंता या बेचैनी से ग्रस्त लोग मां कूष्मांडा की अत्यंत प्रेम और भक्ति से पूजा-अर्चना कर सकते हैं और मां दुर्गा को प्रसन्न करने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ का पाठ कर सकते हैं.

चौथा दिन शुभ रंग – नारंगी

नारंगी रंग पहनने से उनमें स्फूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है क्योंकि यह साहस, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है. इसके अलावा, यह रंग जीवन में स्फूर्ति और खुशहाली लाता है. यह रंग सकारात्मकता और आध्यात्मिक शक्ति देता है. देवी मां का संस्कृत नाम कुष्मांडा है.

देवी कूष्मांडा के बारे में

ऐसा माना जाता है कि जब भगवान विष्णु ने सर्वप्रथम ब्रह्मांड की रचना की, तब सब कुछ अंधकारमय था. लेकिन जब उन्होंने मुस्कुराया, तो एक निराकार प्रकाश चारों ओर फैल गया, जिससे आकाशगंगा और अन्य ग्रहों सहित संपूर्ण ब्रह्मांड प्रकाशित हो गया. इस प्रकाश ने देवी कूष्मांडा का रूप धारण किया. क्योंकि प्रकाश के बिना कहीं भी जीवन संभव नहीं है, इसलिए उन्होंने शून्य से संसार की रचना की है. यह भी कहा जाता है कि देवी कूष्मांडा ऊष्मा, प्रकाश और ऊर्जा का स्रोत बनीं और सूर्य को भी ये तत्व उन्हीं से प्राप्त होते हैं. आदि शक्ति, जो समस्त ऊर्जा का स्रोत हैं, मां दुर्गा का यही स्वरूप हैं. जिनके आठ हाथ हैं और उन्हें सिंहनी पर सवार दिखाया गया है. उनके दाहिने हाथ में कमंडल, धनुष बाण और कमल हैं तथा बाएं हाथ में अमृत कलश, जप माला, गदा और चक्र हैं. इस आठ हाथों के कारण ही उन्हें अष्टभुजा देवी नाम दिया गया है.

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